हमने फूंका जो आशियाने को, तब मिली रोशनी जमाने को...

स्वतंत्रता दिवस व काकोरी कांड की शताब्दी वर्ष पर तहज़ीब फ़ाउंडेशन ने कार्यक्रम आयोजित किया.

मेदिनीनगर. स्वतंत्रता दिवस व काकोरी कांड की शताब्दी वर्ष पर तहज़ीब फ़ाउंडेशन ने कार्यक्रम आयोजित किया. शहर के पंडित दीन दयाल उपाध्याय स्मृति नगर भवन में कला और साहित्य को समर्पित बज़्म-ए-तहज़ीब का आयोजन हुआ. इसकी अध्यक्षता फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष प्रेम भसीन ने की. तीन सत्रों में कार्यक्रम संपन्न हुआ. मुख्य अतिथि वरीय चिकित्सक रघुवंश नारायण सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया. मौके पर विशिष्ट अतिथि व्यवसायी नवल तुलस्यान,प्रभात अग्रवाल,अविनाश देव मौजूद थे.संस्था के महासचिव डॉ. अशरफ जमाल अश्क ने विषय प्रवेश कराया. अशफ़ाक उल्ला खां ने फरारी के दिनों में डालटनगंज को अपना आश्रय स्थल बनाया और नगरपालिका में कार्य किया था.उत्तर प्रदेश इप्टा के महासचिव शहजाद रिज़वी व फरजाना मेहदी ने अशफाक उल्ला खां की ग़ज़ल सुनाएं ग़म की किसे कहानी हमें तो अपने सता रहे हैं, हमेशा सुबह-ओ-मसावह दिल पे सितम के ख़ंजर चला रहे हैं पेश करते हुए दास्तानगोई की शुरुआत की. इस दौरान उन्होंने अशफ़ाक उल्ला खां के संबंध में उनके दोस्त राम प्रसाद बिस्मिल और अन्य क्रांतिकारी के विचार कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया. मुशायरा सह कवि सम्मेलन में कवि-शायरों ने स्वतंत्रता संग्राम और जज़्बात से भरे आसार पेश किये. जमशेदपुर के प्रोफेसर अहमद बद्र ने हमने फूंका जो आशियाने को, तब मिली रोशनी ज़माने को गजल पेश किया.

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Author: DEEPAK

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