भागवत कथा को आत्मसात करने से ही कल्याण संभव

श्रीमदभागवत कथा सप्ताह ज्ञान महायज्ञ का 18 वां अधिवेंशन संपन्न

श्रीमदभागवत कथा सप्ताह ज्ञान महायज्ञ का 18 वां अधिवेंशन संपन्न

मेदिनीनगर. शहर के रेड़मा ठाकुरबाड़ी परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान महायज्ञ का 18वां अधिवेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. इस अवसर पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुष उपस्थित हुए. भागवत पुराण का पूजन और आरती के बाद कथा का शुभारंभ हुआ. वृंदावन धाम से पधारी कथा व्यास अलका किशोरी ने भागवत पुराण के आधार पर भक्तों को कथा का रसपान कराया. उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में विवाह प्रसंग और सुदामा-कृष्ण मिलन की चर्चा अत्यंत मार्मिक ढंग से की. कथा व्यास ने भागवत कथा श्रवण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके उपदेशों को जीवन में आत्मसात करने से ही कल्याण संभव है. मानव शरीर दुर्लभ है और इसकी सार्थकता भगवान की कथा सुनने तथा भक्ति करने में है. उन्होंने बताया कि जब जीव पर ईश्वर की कृपा होती है, तभी उसे सत्संग और संतों की संगति प्राप्त होती है. ऐसे अवसर को व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए और सत्यकर्म के साथ प्रभु से प्रेम का संबंध जोड़ना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापक सत्ता और कर्माध्यक्ष हैं, जबकि जीव कर्म करने के लिए स्वतंत्र है. प्रत्येक कर्म का फल अवश्य भोगना पड़ता है, चाहे वह अच्छा हो या बुरा. शास्त्रों के अनुसार मानव जीवन की सार्थकता निष्काम भक्ति में है। मन को नियंत्रित कर परात्मा की प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ करना चाहिए. इस अवसर पर आयोजन समिति के संरक्षक विजय तिवारी, सुनील तिवारी, अध्यक्ष अजय तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाया.

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By Akarsh Aniket

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