सरहुल पर्व पर जिला मुख्यालय मेदिनीनगर में 16 प्रखंड के 211 गांव के आदिवासियों का हुआ जुटान

जिले के 16 प्रखंडों के 211 गांवों व टोले के अखरा में पूजा कर आदिवासियों ने पारंपरिक तरीके से सरहुल पर्व महोत्सव मनाया.

मेदिनीनगर. पलामू में प्रकृति से जुड़ा पर्व सरहुल पूजा महोत्सव मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. जिले के 16 प्रखंडों के 211 गांवों व टोले के अखरा में पूजा कर आदिवासियों ने पारंपरिक तरीके से सरहुल पर्व महोत्सव मनाया. पूजा-अर्चना के बाद आदिवासियों ने अद्दि कुडूख सरना समाज के बैनर तले शोभायात्रा निकाली. जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के जिला स्कूल के मैदान में सरना समाज का जिला स्तरीय मिलन सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इसमें पलामू जिले के 16 प्रखंडों के कई गांवों से आदिवासियों का जुटान हुआ. सभी प्रखंड क्षेत्र से बाजे-गाजे के साथ शोभायात्रा लेकर जिला स्कूल मैदान पहुंचे. सरना समाज के लोग मांदर की थाप पर पारंपरिक गीतों के साथ नृत्य करते हुए ग्रामीण इलाकों से लोग शोभायात्रा में शामिल हुए. मैदान खचाखच भरा हुआ था और सड़कों पर जाम की स्थिति बनी हुई थी. पुलिस प्रशासन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय दिखी. समारोह में शामिल लोगों की सुविधा के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था की गयी थी. समारोह में अतिथि के रूप में पाटन सीओ राकेश श्रीवास्तव, जिला परिषद सदस्य बासो देवी, सदर प्रखंड प्रमुख बसंती देवी, उप प्रमुख शीतल सिंह चेरो, पूर्व जिप सदस्य अर्जुन सिंह, मुखिया दुलारी देवी, कुमारी अंजना सिंह, अलका कुमारी, बिंको उरांव, पंचायत समिति सदस्य अजीत सिंह, पूर्व पार्षद नीरा देवी मौजूद थे. समारोह की अध्यक्षता सरना समाज के संयोजक श्यामलाल उरांव ने की. संचालन जिला अध्यक्ष मिथलेश उरांव व उपाध्यक्ष सुनील उरांव ने संयुक्त रूप से किया. समारोह में अद्दि कुडुख सरना समाज की जिला कमेटी ने सभी अतिथियों को अंग वस्त्र देकर स्वागत किया. सरना समाज के जिला पाहन बिंदेश्वर उरांव के अलावा सभी गांवों के पाहन, मेहता व प्रधान को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया. जिला संयोजक श्यामलाल उरांव ने सरहुल पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि धरती पर जीवन आबाद रहे. इसके लिए पर्यावरण की रक्षा करना जरूरी है. आज के दिन पौधा लगाओ और पेड़ बचाओ अभियान चलाने का संकल्प लेने की आवश्यकता है. उन्होंने सरकार से यह अपील की कि यदि सही मायने में पर्यावरण की रक्षा करना चाहते हैं, तो सरहुल को राजकीय त्योहार एवं पर्यावरण दिवस घोषित करें. अतिथि पाटन सीओ श्री श्रीवास्तव ने कहा कि सरहुल पर्व प्रकृति से जुड़ने व उसकी रक्षा करने का संदेश देता है. इसके संदेशों को अपनाते हुए पर्यावरण की रक्षा के लिए अधिक से अधिक पौधा लगाने व पेड़ों को बचाने की जरूरत है. समारोह में सरना समाज के अनिता भगत, सरित उरांव, सुरेंद्र उरांव, सत्यनारायण उरांव, शंकर उरांव, श्रवण उरांव, मुखदेव उरांव, धीरेंद्र उरांव, अजय सिंह चेराे, संतोष उरांव सहित काफी संख्या में महिला-पुरूष शामिल थे. मिलन समारोह में जिले के चैनपुर के कोदुवाडीह, खुरा, जयनगरा, गुरहा, शाहपुर, चांदो, अलगडीहा, रामगढ़ प्रखंड के नावाडीह, रामगढ़, बांसडीह, उलडंडा, लेस्लीगंज के जुरू, सदर प्रखंड के गुरियाही, खनवा, बहलोलवा, लिलवाकरम, पोखराहा, कला, महादेव माड़ा, गनके सुआ कौड़िया, कुंडेलवा, झाबर के अलावा पाटन, नावाजयपुर, मनातू, तरहसी, छतरपुर, नौडीहा बाजार, विश्रामपुर, पड़वा, पीपरा, हुसैनाबाद सहित अन्य प्रखंड के आदिवासी समाज के लोग शोभायात्रा के साथ पहुंचे थे.

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Published by: Satyaprakash pathak

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