मेदिनीनगर. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) ने नवनियुक्त सहायक आचार्यों के लिए टीएलएम के महत्व एवं उसके प्रभावी उपयोग पर आधारित प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया. कार्यक्रम की शुरुआत डायट प्रभारी डॉ धीरेंद्र सिंह ने की. प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षक दिनेश कुमार शुक्ला ने भाषा शिक्षण में टीएलएम के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला.उन्होंने बताया कि भाषा शिक्षण में ध्वनि जागरूकता विकसित करने के लिए टीएलएम अत्यंत उपयोगी है. विभिन्न गतिविधियों और उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि किस प्रकार सरल शिक्षण सामग्री के प्रयोग से बच्चों में पढ़ने-लिखने की प्रारंभिक क्षमता को सशक्त बनाया जा सकता है. प्रशिक्षिका पूजा सिन्हा ने पर्यावरण अध्ययन में टीएलएम के उपयोग को स्पष्ट करते हुए बताया कि स्थानीय परिवेश और उपलब्ध संसाधनों से तैयार की गयी शिक्षण सामग्री बच्चों में पर्यावरणीय समझ और जिज्ञासा को विकसित करती है.वहीं प्रशिक्षक जयशंकर प्रसाद सोनी ने गणित शिक्षण में टीएलएम की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि गतिविधि आधारित शिक्षण सामग्री के प्रयोग से गणित को बच्चों के लिए सरल, रोचक और व्यवहारिक बनाया जा सकता है.
भाषा शिक्षण में ध्वनि जागरूकता विकसित करने के लिए टीएलएम उपयोगी
भाषा शिक्षण में ध्वनि जागरूकता विकसित करने के लिए टीएलएम उपयोगी
