तीन नाला पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे प्रतिनिधि, मेदिनीनगर पलामू जिले के सुदुरवर्ती इलाका मनातू प्रखंड के वंशी खुर्द जंगल में बना एकलव्य विद्यालय कई समस्याओं से जूझ रहा है. विद्यालय तक जाने के लिए सुगम रास्ता भी नहीं है. जंगली क्षेत्र के उबड़-खाबड़ व टेडीमेढे कच्चे रास्ते से होकर किसी तरह विद्यालय तक पहुंचा जा सकता है. बरसात के दिनों में एकलव्य विद्यालय आबादी से कट जाता है. क्योंकि जिस जगह पर विद्यालय भवन बना है आसपास कई किलोमीटर तक कोई घर नहीं है. तीन नाला पार कर ही विद्यालय तक पहुंचा जाता है. इतना ही नहीं विद्यालय के परिसर में भी एक नाला बहता है, जो विद्यालय भवन व छात्रावास को दो भागों में बांटता है.लोगों की माने तो बारिश होने पर नाला में पानी भर जाता है.ऐसी स्थिति में आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाती है. बरसात में किसी तरह पैदल ही लोग आते जाते हैं. कच्ची सड़क होने की वजह से लोग जूता-चपल को हाथ में लेकर हाट बाजार जाते है. पदमा मनातू मार्ग पर सेमरी गांव से करीब सात किलोमीटर दूर वंशी खुर्द गांव है. इस गांव से करीब डेढ किलोमीटर जंगली क्षेत्र में यह विद्यालय खोला गया है.सेमरी गांव से ही कच्ची सड़क शुरू हो जाती है.कुछ दूर तक पक्की सड़क है,जो जर्जर स्थिति में है. इस तरह विद्यालय तक आनेजाने का कोई सुगम रास्ता नही है. विद्यालय में कार्यरत कर्मियों की माने तो आमदिनों में किसी तरह लोग जरूरत का सामान लेने के लिए हाट बाजार पहुंच जाते है. लेकिन बरसात के दिन में यह सफर काफी मुश्किल भरा होता है. बीमार होने पर इलाज कराने स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हालांकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा विद्यालय में शिविर लगाकर कर्मियों व बच्चों का स्वास्थ्य जांच किया जाता है. रास्ता खराब होने की वजह से विद्यालय में खाद्य सामग्री पहुंचने में भी काफी परेशानी होती है. मालूम हो कि सरकार ने आदिम जनजाति के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए एकलव्य आवासीय विद्यालय संचालित कर रही है.
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