भवन हैं, शिक्षक नहीं… जूझता नीलांबर–पीतांबर विश्वविद्यालय

17 साल बाद भी जूझ रहा नीलांबर–पीतांबर विश्वविद्यालय

17 साल बाद भी जूझ रहा नीलांबर–पीतांबर विश्वविद्यालय

शिवेंद्र कुमार, मेदिनीनगर पलामू प्रमंडल का प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान नीलांबर–पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) अपनी स्थापना के 17 वर्ष पूरे कर चुका है, लेकिन आज भी यह विश्वविद्यालय शिक्षकों और कर्मियों की भारी कमी से जूझ रहा है. विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2009 में पलामू जैसे पिछड़े इलाके में उच्च शिक्षा के विकास के उद्देश्य से की गयी थी, ताकि छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए रांची जैसी दूर की जगहों पर भटकना न पड़े. लेकिन इतने वर्षों बाद भी विश्वविद्यालय अपने मूल उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर सका है.

वर्तमान समय में विश्वविद्यालय और इसके अधीन संचालित कॉलेजों में विषयवार शिक्षकों का अभाव है. कई विभागों में मात्र एक शिक्षक के भरोसे सैकड़ों विद्यार्थियों की पढ़ाई करायी जा रही है. ऐसी स्थिति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव नहीं है. शिक्षकों की कमी का असर केवल कक्षा शिक्षण पर ही नहीं, बल्कि परीक्षा, मूल्यांकन, प्रायोगिक कार्य और शोध गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है.

मॉडल डिग्री कॉलेज खुले, पर संसाधन नहीं

एनपीयू की स्थापना के बाद पलामू, गढ़वा और लातेहार जिले में कई मॉडल डिग्री कॉलेज खोले गये. लातेहार महिला कॉलेज, छतरपुर, गढ़वा और हुसैनाबाद में करोड़ों की लागत से भवन तो बने, लेकिन पर्याप्त शिक्षक और शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं कराये गये. संसाधनों के अभाव में इन कॉलेजों की शैक्षणिक व्यवस्था कमजोर होती जा रही है. यही कारण है कि इन संस्थानों में नामांकन घट रहा है, जबकि इसके विपरीत संबद्धता प्राप्त कॉलेजों में छात्रों की संख्या अधिक और पढ़ाई अपेक्षाकृत बेहतर है.

शैक्षणिक सत्र और परीक्षा परिणाम में देरी

विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था भी पटरी पर नहीं है. पीजी सत्र 2023–25 के तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा अब तक नहीं हो सकी है, जबकि टेंटेटिव कार्यक्रम जारी किया जा चुका था. नयी शिक्षा नीति के तहत स्नातक सत्र 2022–26 में अब तक केवल तीन सेमेस्टर की ही परीक्षा ली गयी है. एनइपी स्नातक सत्र 2024–28 का फर्स्ट सेमेस्टर रिजल्ट अब तक घोषित नहीं हुआ है, जबकि नामांकन करीब दो वर्ष पहले हुआ था. वहीं सत्र 2025–29 के प्रथम सेमेस्टर का फॉर्म तक नहीं भरा जा सका है.

लाइब्रेरी और शोध की स्थिति चिंताजनक

एनइपी लागू होने के बावजूद कई कॉलेजों की लाइब्रेरी में संबंधित पाठ्यक्रम की पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं. पुस्तक के अभाव में विद्यार्थी परीक्षा और प्रतियोगिता की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। स्नातकोत्तर विभाग अब तक स्थायी भवन में शिफ्ट नहीं हो सका है और हॉबी सेंटर में संचालित हो रहा है. संसाधन, मार्गदर्शन और समयबद्ध व्यवस्था के अभाव में शोध कार्य भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहे हैं. नीलांबर–पीतांबर विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति उच्च शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करती है. छात्र, शिक्षक और अभिभावक राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से अविलंब ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, ताकि एनपीयू अपने स्थापना उद्देश्य को सही मायने में पूरा कर सके.

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By Akarsh aniket

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