टैक्स बढ़ा, सुविधाएं नहीं मिलीं, लोगों में गुस्सा

निगम में शामिल होने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं से उपेक्षित हैं लोग

निगम में शामिल होने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं से उपेक्षित हैं लोग वार्ड संख्या दो स्थित बैंक कॉलोनी मुहल्ला में लगा प्रभात आपके द्वार प्रतिनिधि, मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या दो स्थित बैंक कॉलोनी मोहल्ला में बुधवार को प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान मोहल्लेवासियों ने खुलकर अपनी पीड़ा रखी. लोगों ने बताया कि वर्ष 2017 से पहले यह इलाका सदर प्रखंड के जोड़ पंचायत के अधीन था. उस समय भी यह क्षेत्र विकास के मामले में उपेक्षित था. सरकार द्वारा मेदिनीनगर प्रखंड के कुछ पंचायतों को शामिल कर नगर परिषद को प्रमोट करते हुए नगर निगम बनाया गया और वर्ष 2018 में चुनाव हुआ. तब लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा और शहरी सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. मोहल्लेवासियों का कहना है कि नगर निगम में शामिल होने का कोई लाभ इस इलाके को नहीं मिला, बल्कि टैक्स का बोझ जरूर बढ़ गया. मेयर, डिप्टी मेयर व नगर आयुक्त ने नहीं ली सुध शहर के हृदय स्थली छह मुहान से करीब ढाई किलोमीटर दूर यह मोहल्ला आज भी विकास से कोसों दूर है. लोगों ने बताया कि निगम में शामिल होने के बाद पदाधिकारियों ने शहरी सुविधाएं देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलीं. चुनाव के बाद सांसद-विधायक को छोड़ दें, तो नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर व नगर आयुक्त ने कभी इस इलाके का दौरा तक नहीं किया. जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक उपेक्षा के कारण लोगों में आक्रोश व्याप्त है. मौके पर प्रसून कुमार, मिथिलेश सिंह, उदय सिंह, मुकेश सिंह, जितेंद्र सिंह, वृंदा गुप्ता, राजेंद्र राम, उमाकांत गुप्ता, बीरेंद्र साव, रामभजन साव, प्रेम सागर सिंह, विक्की गुप्ता, मुन्ना सोनी, ललित गुप्ता, ममता सिंह, किरण सिंह, प्रभा देवी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. विकास कार्यों के प्रति गंभीरता नहीं नगर निगम में शामिल होने के बाद भी मोहल्ला में विकास कार्यों के प्रति कोई गंभीरता नहीं दिखाई गयी. अधिवक्ता धीरेंद्र कुमार ने कहा कि सात वर्षों में निगम के किसी भी पदाधिकारी ने झलक तक नहीं दिखायी. रविन्द्र तिवारी ने बताया कि सड़क और नाली का निर्माण नहीं हुआ है. ऊबड़-खाबड़ कच्चे रास्ते से लोगों को आना-जाना पड़ता है. विपिन सिंह ने कहा कि निगम प्रशासन शुरू से ही समस्याओं के समाधान के प्रति उदासीन रहा है.अमृता सिंह ने कहा कि शहरी सुविधा तो नहीं मिली, उल्टे टैक्स का बोझ लाद दिया गया. स्ट्रीट लाइट भी नहीं है. राधिका पाठक ने बताया कि इलाका ड्राइ जोन बन गया है और हमेशा जल संकट बना रहता है. गर्मी में पानी के लिए लोगों को काफी जुगाड़ करना पड़ता है. सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है, लेकिन नगर निगम ने अब तक जलापूर्ति की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की है.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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