मेदिनीनगर. पुलिस की छवि आमतौर पर सख्त और रौबदार मानी जाती है, लेकिन पलामू के छत्तरपुर अनुमंडल में पुलिस का मानवीय चेहरा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) प्रशांत कुमार अपराध नियंत्रण और कांडों के पर्यवेक्षण के साथ ग्रामीणों से सीधे जुड़कर पुलिस और जनता के बीच भरोसे की दूरी कम करने की कोशिश कर रहे हैं.
फाइलों से निकलकर गांवों तक पहुंच रही पुलिस
SDPO प्रशांत कुमार की कार्यशैली सिर्फ कार्यालय में बैठकर मामलों की समीक्षा करने तक सीमित नहीं है. कांडों के पर्यवेक्षण के लिए क्षेत्र में निकलने के दौरान वे रास्ते में ग्रामीणों को देखकर अपनी गाड़ी रुकवाते हैं और उनसे सहज तरीके से बातचीत करते हैं.
समस्याओं के समाधान का भरोसा
इस दौरान वे ग्रामीणों की रोजमर्रा की समस्याओं, क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और पुलिस से जुड़ी उनकी अपेक्षाओं के बारे में जानकारी लेते हैं. मौके पर ही समस्याओं के समाधान का भरोसा भी देते हैं. इससे ग्रामीणों में पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ने की बात सामने आ रही है.
बच्चों को पढ़ाई और संस्कार की सीख
SDPO का जनसंवाद बच्चों और युवाओं पर भी केंद्रित है. ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों से मुलाकात के दौरान वे उन्हें नियमित पढ़ाई, अनुशासन और अच्छे संस्कारों के महत्व के बारे में बताते हैं. वहीं युवाओं को नशे और गलत संगति से दूर रहने की सलाह देते हैं. वे युवाओं को शिक्षा, खेलकूद, रोजगार और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
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मजबूत पुलिसिंग की ताकत
प्रशांत कुमार का मानना है कि पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है. जनता के बीच जाकर उनका विश्वास जीतना और युवाओं को सही दिशा देना भी पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है. उनके अनुसार, जब लोग पुलिस को अपना सहयोगी और मददगार समझते हैं, तो अपराध और असामाजिक गतिविधियों की जानकारी भी समय पर पुलिस तक पहुंचती है. इससे अपराध पर प्रभावी तरीके से नियंत्रण करने में मदद मिलती है.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिली पहचान
प्रशांत कुमार की जन-केंद्रित कार्यशैली को उनके सेवा कार्यों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. वर्ष 2016 में समाज सेवा और अनुकरणीय कार्यों के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना सम्मान से सम्मानित किया गया था. वर्ष 2017 में उन्हें तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा राष्ट्रीय विसाका सम्मान भी प्रदान किया गया. इसी वर्ष उन्होंने दक्षिण कोरिया गये भारतीय युवा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था.
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'पुलिस आपके साथ है' को जमीन पर उतारने की कोशिश
ग्रामीणों से सीधा संवाद, बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने की पहल पुलिस की जन-केंद्रित कार्यशैली को सामने ला रही है. SDPO प्रशांत कुमार की यह कार्यशैली पुलिस और जनता के बीच बेहतर संबंध बनाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है. अपराध नियंत्रण के साथ सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर देकर वे 'पुलिस आपके साथ है' के संदेश को जमीन पर उतारने की दिशा में काम कर रहे हैं.
