रक्षक निजी अस्पताल सील, एक गिरफ्तार, भेजा गया जेल

रक्षक निजी अस्पताल के खिलाफ मेडिकल ऑफिसर डा एमके रवि के द्वारा शहर थाना में रक्षक अस्पताल के संचालक पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है.

मेदिनीनगर. मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के समीप रक्षक निजी अस्पताल के खिलाफ मेडिकल ऑफिसर डा एमके रवि के द्वारा शहर थाना में राजकुमार प्रजापति, रोहित प्रजापति व रक्षक अस्पताल के संचालक पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. पुलिस ने राजकुमार प्रजापति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. अन्य दो लोगों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. यह कार्रवाई अनुमंडल पदाधिकारी सुलोचना मीणा के निर्देश पर किया गया. मालूम हो कि बुधवार दोपहर 1:10 बजे सदर एसडीओ ने उक्त रक्षक अस्पताल में छापेमारी की थी. इस दौरान राजकुमार प्रजापति द्वारा मरीज को देखने के बाद एमबीबीएस डॉक्टर आरके भारती के नाम से पर्ची पर दवा लिखा गया था. जबकि उसके पास डॉक्टर की कोई डिग्री नहीं है. एसडीओ सुश्री मीणा ने उसे हिरासत में लेते हुए शहर थाना भेज दिया था. छापेमारी के दौरान रोहित कुमार अल्ट्रासाउंड कर रहा था. उसके पास अल्ट्रासाउंड करने का कोई डिग्री नहीं है. जबकि अल्ट्रासाउंड करने के लिए रेडियोलॉजिस्ट की डिग्री होना जरूरी है. अल्ट्रासाउंड करने के लिए प्रत्येक मरीज से 800 वसूला जा रहा था. बुधवार को दोपहर एक बजे तक छह व्यक्तियों का अल्ट्रासाउंड कर चुका था. एसडीओ ने बताया कि अस्पताल का सीसीटीवी कैमरा भी काफी दिनों से खराब है. जिससे यह पता कर पाना मुश्किल है कि कौन-कौन डॉक्टर इस अस्पताल में आते हैं. इस अस्पताल में जितने भी मरीज भर्ती थे. सील करने के बाद सभी मरीज को एमएमसीएच अस्पताल में भर्ती करा दिया गया. वहां उनका इलाज चल रहा है. छापेमारी के दौरान अस्पताल में रखे रजिस्टर को भी जब्त कर लिया गया है. जिसमें मरीज का नाम और पैसा लेने की जानकारी लिखी हुई थी. एसडीओ ने बताया कि इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट डीसी को भेज दिया गया है. सिविल सर्जन को इस बारे में कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. एसडीओ ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी दलाल के चक्कर में ना पड़ें. बीमार पड़ने पर सीधे एमएमसीएच में जाकर इलाज करायें. किसी मरीज को कोई परेशानी होती है, तो उसकी जानकारी दें. एसडीओ ने कहा कि अनुमंडल क्षेत्र में फर्जी अस्पताल व अल्ट्रासाउंड संचालित करने वाले के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके पूर्व में दो बार रक्षक अस्पताल में कार्रवाई की गयी है. इसके बाद भी विभाग के द्वारा संचालित करने का आदेश कैसे दिया गया. बिना डाक्टर व टेक्नीशियन के ही संचालित होता रहा है.

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Published by: Satyaprakash pathak

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