पाटन में सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, महादेव के जयघोष से गूंजे शिवालय

पलामू के पाटन प्रखंड में सावन की तीसरी सोमवारी और नागपंचमी पर शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने महादेव का जलाभिषेक कर सुख-शांति की कामना की।

पलामू: पलामू जिले के पाटन में सावन माह की तीसरी सोमवारी और नागपंचमी के अवसर पर सोमवार को पूरे पाटन प्रखंड में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला. प्रखंड के विभिन्न शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. हर-हर महादेव और भोले शंकर के जयघोष से पूरा प्रखंड भक्तिमय हो गया.

काला पहाड़ स्थित महाकालेश्वर महादेव मंदिर, किशुनपुर स्थित काली मंदिर एवं शिव मंदिर, मौर्याटांड़ स्थित शिवशक्ति मंदिर, पाटन बुढ़वा बाबा मंदिर, जागृत शिव मंदिर, इमली शिव मंदिर, भरहुलिया शिव मंदिर, आनंदनगर घोरीघाट मंदिर, कोल्हुआ शिव मंदिर सहित प्रखंड के विभिन्न मंदिरों में सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की.

महाकालेश्वर मंदिर में किया जलाभिषेक

काला पहाड़ स्थित महाकालेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं ने बंका नदी और सतवहिनी नदी के संगम से कलश में जल भरा और बाबा महादेव का जलाभिषेक किया. श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर अपने परिवार और क्षेत्र में अमन-चैन, सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की.

जयघोष से गूंजता रहा पूरा प्रखंड

सोमवारी के अवसर पर प्रखंड के विभिन्न शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. हर-हर महादेव, जय भोले शंकर सहित विभिन्न धार्मिक जयघोष से मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र गूंजता रहा. श्रद्धालुओं में भगवान शिव के प्रति विशेष आस्था और उत्साह देखने को मिला.

इमली शिव पहाड़ पर सांस्कृतिक कार्यक्रम

प्रखंड के इमली शिव पहाड़ स्थित शिव मंदिर परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें विभिन्न कलाकारों ने भक्ति गीत प्रस्तुत किये. भक्ति गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद उठाया.

31 वर्षों से हो रहा जलाभिषेक

काला पहाड़ स्थित महाकालेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी कठिन स्वामी ने बताया कि मंदिर परिसर में पिछले 31 वर्षों से श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं. सावन की सोमवारी के अवसर पर श्रद्धालु बंका नदी और सतवहिनी नदी के संगम से जल लेकर बाबा महाकालेश्वर का जलाभिषेक करते हैं.

श्रद्धालुओं ने बताया कि वे कई वर्षों से बाबा महादेव का जलाभिषेक करते आ रहे हैं. जब तक शरीर में प्राण रहेगा, तब तक बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते रहेंगे. श्रद्धालुओं की आस्था और सहभागिता ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया.

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By Prabhat khabar news desk

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