रमेश रंजन की रिपोर्ट
Palamu News: पलामू जिला के सतबरवा प्रखंड मुख्यालय से महज दो किलोमीटर दूर रबदा ग्राम पंचायत का ठेमी गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है. इस महादलित (भुइयां परिवार) बस्ती में पसरी घोर गरीबी, बेरोजगारी और अशिक्षा ने जनजीवन नारकीय बना दिया है. शासन-प्रशासन की बेरुखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. गांव में रोजगार का कोई साधन नहीं होने के कारण युवा वर्ग अपनी पत्नी और बच्चों के साथ ईंट भट्टों के अलावा दिल्ली, बेंगलुरु और पंजाब जैसे अन्य राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर हैं. वहीं, गांव के बुजुर्ग महिला और पुरुष पलामू किला के जंगलों से सूखी जलावन की लकड़ी चुनकर और उसे बेचकर दशकों से अपना भरण-पोषण कर रहे हैं. दशकों तक यहां की महिलाएं पशुओं के लिए घास बेचती थीं और पुरुष जमींदारों के पास बंधुआ मजदूर थे. आज बंधुआ मजदूरी तो खत्म हो गई, लेकिन माली हालत वैसी ही बनी हुई है.
आठवीं के बाद पढ़ाई पर लग रहा विराम
इस डिजिटल युग में भी गांव का एक भी दलित व्यक्ति आज तक मैट्रिक (10वीं) पास नहीं कर सका है. ग्रामीण बमुश्किल आठवीं तक ही पढ़ पाए हैं. गरीबी के कारण ग्रामीण रोजगार की तलाश में सपरिवार पलायन कर जाते हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा छूट जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि जब पेट भरना ही चुनौती हो, तो पढ़ाई पर कौन ध्यान दे? जर्जर आंगनबाड़ी भवन के बीच गांव में नशाखोरी भी तेजी से बढ़ी है, जिससे कई लोग असमय काल के गाल में समा चुके हैं.
रोजगार होता तो नहीं करना पड़ता पलायन: ग्रामीण महिलाएं
गांव की चांदनी देवी, सीमा देवी, फूलमती देवी और बासो देवी ने बताया कि गांव में सड़क, नाली और रोजगार का घोर अभाव है. अगर गांव में काम मिलता, तो बाल-बच्चों के साथ दूसरे राज्यों (दिल्ली, बेंगलुरु, पंजाब) में ईंट-भट्टों पर मजदूरी के लिए नहीं भटकना पड़ता. स्थिति यह है कि गांव की महिलाओं और बुजुर्गों को पलामू किला के जंगलों से सूखी लकड़ियां बेचकर जीवन यापन करना पड़ रहा है.
नल-जल योजना फेल
गांव में पानी की समस्या है. ग्रामीणों ने बताया कि घरों में नल तो लगा दिए गए, लेकिन छह साल बीतने के बाद भी एक बूंद पानी नहीं आया. ग्रामीण 70-80 साल पुराने कुएं का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे मौसमी बीमारियां फैलती हैं. आंगनबाड़ी के पास स्थित खराब सोलर जलमीनार को ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर ठीक कराया है. ग्रामीणों ने यहां तत्काल नए चापानल लगाने की मांग की है.
आज तक कोई सांसद, विधायक या बड़ा अधिकारी इस बस्ती में नहीं आया
संजू भुइयां, सुनील भुइयां और दुलार भुइयां ने बताया कि गांव के अधिकतर बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन और महिलाओं को ‘मंइयां सम्मान योजना’ का लाभ नहीं मिल रहा है. मिट्टी के जर्जर मकान होने के बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति नहीं मिली, जिससे पूरा परिवार एक ही कमरे में रहने को विवश है. आज तक कोई सांसद, विधायक या बड़ा अधिकारी इस बस्ती में नहीं आया.
प्रशासन दे विशेष ध्यान: मनोज भुइयां
मनरेगा वॉच के प्रखंड कोऑर्डिनेटर मनोज भुइयां ने कहा कि मुख्यालय के पास होने के बावजूद आजीविका और शिक्षा के अभाव में यह दलित बहुल गांव बेहद दयनीय स्थिति में है
सांसद से मामले को कराया जाएगा अवगत: सांसद प्रतिनिधि
चतरा सांसद कालीचरण सिंह के प्रतिनिधि अनिल सिंह ने कहा कि गरीबी और पलायन के कारण ठेमी गांव विकास में काफी पिछड़ गया है जिला प्रशासन को यहां विशेष ध्यान देने की जरूरत है. इस गंभीर समस्या से सांसद को जल्द अवगत कराया जाएगा.
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