पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट
Palamu News: झारखंड के पलामू जिले में स्कूल भवन निर्माण के नाम पर बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है. जिले के 52 स्कूल ऐसे हैं, जहां भवन निर्माण के लिए सरकारी राशि की निकासी तो कर ली गई, लेकिन वर्षों बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया. विभागीय रिपोर्ट के अनुसार इन विद्यालयों में सरकार का लगभग 1.25 करोड़ रुपये फंसा हुआ है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह मामला कोई नया नहीं, बल्कि वर्ष 2007 से 2014 के बीच का है. उस दौरान सर्व शिक्षा अभियान के तहत विद्यालयों को मजबूत करने और आधारभूत संरचना विकसित करने के उद्देश्य से भवन निर्माण मद में राशि जारी की गई थी. लेकिन करीब 19 साल बीत जाने के बाद भी कई स्कूलों में भवन अधूरे पड़े हैं.
राशि निकाली गई, लेकिन निर्माण कार्य अधूरा
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों द्वारा राशि की निकासी कर ली गई थी, लेकिन कई जगहों पर निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ, जबकि कहीं भवन अधूरा छोड़ दिया गया. विभाग की ओर से कई बार पत्राचार और नोटिस जारी किए गए, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया. सरकारी राशि वापस कराने और निर्माण कार्य पूरा कराने के लिए विभाग लगातार प्रयास करता रहा. यहां तक कि संबंधित शिक्षकों का वेतन भी रोका गया, लेकिन इसके बावजूद न तो राशि वापस हुई और न ही भवन निर्माण पूरा कराया गया.
शिक्षा विभाग हुआ सख्त
अब विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है. शिक्षा विभाग ने संबंधित लोगों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि एक सप्ताह के भीतर राशि सरकारी खजाने में वापस जमा कराई जाए, अन्यथा प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
जिले के 52 स्कूलों में फंसा सरकारी पैसा
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार पांकी, लेस्लीगंज, तरहसी, छतरपुर, चैनपुर, मनातू, पिपरा, मोहम्मदगंज, नावाबाजार, पाटन, हैदरनगर और सतबरवा प्रखंड के कई स्कूलों में भवन निर्माण की राशि बकाया है. इन स्कूलों में एनपीएस इरगु, एनपीएस अलौला, ओरीया खुर्द, गिरी टोला पचमो, परशुराम खाप, रजहरा आदिवासी टोला, एनपीएस हरिजन टोला नावां, एनपीएस बचकोमा, भगइया टोला जादूडीह, महुआलेवा, तारुदाग, यूएमएस नासो हरिजन टोला, एनपीएस किन्नी, लालगढ़ा, गनसा, बिहरा, कासिमपुर, रघुनाथपुर, तुरीयाही, गोबराही पोखरिया, यूएमएस कुकही, सगही टोला तुंबागड़ा और अधमनिया सहित कुल 52 विद्यालय शामिल हैं. इन स्कूलों में भवन निर्माण के लिए राशि जारी की गई थी, लेकिन आज तक काम पूरा नहीं हो सका.
कई बार हुई समीक्षा बैठक, फिर भी नहीं निकला समाधान
इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग पहले भी कई बार समीक्षा बैठक कर चुका है. जानकारी के अनुसार 20 अक्टूबर 2022 और 11 मई 2023 को संबंधित विद्यालयों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के साथ बैठक आयोजित की गई थी. बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि एक माह के भीतर या तो निर्माण कार्य पूरा किया जाए अथवा निकाली गई राशि वापस जमा कराई जाए. इसके बावजूद किसी प्रकार की प्रगति नहीं हुई. इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को 8 जनवरी और 11 फरवरी को भी पत्र जारी किया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही.
इसे भी पढ़ें: हजारीबाग के कटकमसांडी में सवारी गाड़ी पलटने से एक की मौत, आधा दर्जन लोग घायल
शिक्षा सचिव ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
अब इस पूरे मामले में शिक्षा सचिव ने कड़ा रुख अपनाया है. शिक्षा सचिव ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि संबंधित प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाए और राशि की वसूली के लिए सर्टिफिकेट केस दायर किया जाए. विभाग का मानना है कि सरकारी राशि का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अधिकारियों ने साफ कहा है कि यदि तय समय के भीतर राशि जमा नहीं की गई या निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ, तो संबंधित लोगों को जेल भी जाना पड़ सकता है. इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी होती तो सरकारी राशि का इतना बड़ा मामला वर्षों तक लंबित नहीं रहता.
इसे भी पढ़ें: हजारीबाग में कारोबार को आसान बनाने के लिए टैक्स डिपार्टमेंट की पहल, कारोबारियों किया जागरूक
