पलामू के मजदूर की जिंदगी वेंटिलेटर पर! आयुष्मान के पैसे भी पड़े कम, पिता ने सरकार से मांगी मदद

Palamu News: पलामू के मोहम्मदगंज के रहने वाले धनंजय मेहता सड़क हादसे के बाद 3 महीने से कोमा में हैं. आयुष्मान भारत के 5 लाख खत्म होने के बाद अब बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए परिवार मदद की गुहार लगा रहा है. इस खबर में पढ़ें क्यों परिवार लोग इस वक्त गहरी संकट में हैं?

पलामू से कुंदन चौरसिया की रिपोर्ट

Palamu News, पलामू : पलामू जिले के मोहम्मदगंज प्रखंड अंतर्गत बिचलाडीह गांव का एक गरीब परिवार इन दिनों बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है. घर का मुख्य कमाने वाला सदस्य, धनंजय मेहता (25 वर्ष), पिछले तीन महीने से कोमा में है और उत्तर प्रदेश के बीएचयू (BHU) अस्पताल के आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है. इलाज के भारी-भरकम खर्च के आगे अब इस मजदूर परिवार ने घुटने टेक दिए हैं और रोते हुए सरकार व समाजसेवियों से आर्थिक मदद की भावुक अपील की है.

भीषण सड़क हादसे का हुआ था शिकार

यह दुखद सिलसिला बीते 23 अप्रैल को शुरू हुआ, जब धनंजय भोला मोड़ के समीप एक मुख्य सड़क हादसे का शिकार हो गया था. इस दुर्घटना में उसके सिर पर बेहद गंभीर चोट आई थी. घटना के तुरंत बाद परिजनों ने उसे रांची के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान 9 लाख से अधिक खर्च हो गए.

आयुष्मान कार्ड पड़ा कम

बेहद गरीब परिवार होने के कारण शुरुआती इलाज में सरकार की ‘आयुष्मान भारत योजना’ के तहत मिलने वाली 5 लाख रुपये की सहायता राशि भी खत्म हो गई. इसके बाद परिजनों को कर्ज लेकर बाकी पैसों का इंतजाम करना पड़ा.

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सूरत में करता था मजदूरी

धनंजय खुद गुजरात के सूरत में मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता था. वह पूरे घर का मुख्य स्तंभ था. पिछले साल ही उसकी शादी हुई थी और पत्नी के हाथों की मेहंदी का रंग फीका भी नहीं पड़ा था कि परिवार पर यह दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. धनंजय के पिता कृष्णा मेहता और भाई भी मजदूरी करते हैं, लेकिन इस संकट के कारण अब परिवार की माली हालत पूरी तरह चरमरा गई है.

रोजाना 5,000 रुपये का खर्च, डॉक्टरों ने जताई उम्मीद

रांची के बाद बेहतर इलाज के लिए परिजनों ने धनंजय को वाराणसी के बीएचयू (BHU) अस्पताल में भर्ती कराया, जहां वह 1 मई से आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर है. डॉक्टरों का कहना है कि लंबा इलाज चलने के बाद धनंजय पूरी तरह ठीक हो सकता है. लेकिन संकट यह है कि अस्पताल में दवाओं और अन्य खर्चों के मद में प्रतिदिन लगभग 5,000 रुपये का खर्च आ रहा है, जो इस गरीब परिवार के सामर्थ्य से कोसों दूर हो चुका है.

गांव वालों ने जुटाया चंदा

धनंजय की जिंदगी बचाने के लिए मंगलवार को मोहम्मदगंज के ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं ने एक सराहनीय पहल की. उन्होंने स्थानीय व्यवसायियों और आम लोगों से घूम-घूमकर चंदा इकट्ठा किया. हालांकि, बीएचयू के लंबे और खर्चीले इलाज के आगे यह चंदा ऊंट के मुंह में जीरे के समान है. लाचार पिता कृष्णा मेहता ने रुंधे गले से बताया, “बेटे को बचाने के लिए मैंने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया है, जो कुछ था सब बिक गया. डॉक्टर कह रहे हैं कि वह ठीक हो जाएगा, बस इसीलिए उम्मीद बंधी है और मैं सहयोग के लिए दर-दर भटक रहा हूं.” पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री सहायता कोष, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सहृदय समाजसेवियों से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है.

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Published by: Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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