Palamu Ritu Murder Case: झारखंड के पलामू जिले में रितु हत्याकांड पर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया ने मंगलवार को शाहपुर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में मामले पर विस्तार से अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि रितु हत्याकांड एक गंभीर और संवेदनशील मामला है, लेकिन कुछ लोग पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में लगे हैं. विधायक ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस तंत्र कमजोर होने के कारण आरोपियों की गिरफ्तारी में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही है.
पुलिस की सक्रियता पर उठाए सवाल
विधायक आलोक चौरसिया ने कहा कि इस तरह के गंभीर मामलों में पुलिस को पूरी सक्रियता और जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और प्रभावी जांच जरूरी है, ताकि दोषियों तक जल्द पहुंचा जा सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके.
पुलिस जांच केवल औपचारिकता भर न रहे
उन्होंने कहा कि पुलिस को केवल औपचारिक जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर संभावित साक्ष्य और तथ्य की गंभीरता से जांच करनी चाहिए. उनका कहना था कि जितनी तेजी से ऐसे मामलों में कार्रवाई होगी, उतना ही लोगों का कानून व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा. क्योंकि न्याय में देरी का मतलब अक्सर अफवाहों की फसल उगाना होता है, और राजनीति उस खेत में सबसे पहले पहुंच जाती है.
आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग
आलोक चौरसिया ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि मामले में शामिल सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए. उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़नी चाहिए. विधायक ने कहा कि दोषियों को कानून के दायरे में लाकर उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. उनका मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से समाज में कानून का संदेश जाता है और अपराधियों के मन में भय पैदा होता है.
न्याय के नाम पर राजनीति करने का आरोप
पत्रकारों से बातचीत के दौरान विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ विरोधी इस मामले को न्याय की लड़ाई के रूप में नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि किसी को वास्तव में पीड़ित परिवार की चिंता है, तो उसे पुलिस और प्रशासन पर निष्पक्ष कार्रवाई के लिए दबाव बनाने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप से किसी परिवार को न्याय नहीं मिलता. उनका कहना था कि इस मामले को राजनीतिक मंच बनाने के बजाय दोषियों तक पहुंचने और जांच को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
आरोप सिद्ध हुआ तो इस्तीफा देने की बात
आलोक चौरसिया ने कहा कि उनके खिलाफ जो आरोप लगाए जा रहे हैं, यदि वे सिद्ध हो जाते हैं तो वह राजनीति से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि तथ्यों के आधार पर जांच होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति को बिना प्रमाण के कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आरोपों की जांच होना जरूरी है, लेकिन निर्णय साक्ष्यों के आधार पर ही होना चाहिए.
पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने का दावा
विधायक ने कहा कि वह रितु के परिवार के साथ खड़े हैं और उनकी प्राथमिकता यही है कि दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिले. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस तंत्र को मजबूत किए बिना गंभीर आपराधिक मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव नहीं है. इसलिए पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में और अधिक प्रभावी कार्रवाई हो सके.
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निष्पक्ष जांच पर दिया जोर
अपने बयान के अंत में विधायक ने दोहराया कि रितु हत्याकांड की जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जांच में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए और जो भी दोषी हों, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे.
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