पलामू में पुलिया ध्वस्त, 1500 लोग टापू में कैद; अस्पताल का रास्ता बंद होने से महिला ने गांव में ही दिया बच्चे को जन्म

पलामू के खुरा गांव में पुलिया टूटने से 1500 लोगों का संपर्क कटा। एम्बुलेंस न मिलने पर प्रसूता ने गांव में ही बच्चे को जन्म दिया। ग्रामीण प्रशासन से नाराज हैं।

पलामू. लगातार हो रही बारिश के बीच पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड की चांदो पंचायत स्थित खुरा गांव को जोड़ने वाली एकमात्र पुलिया मंगलवार रात तेज बाढ़ में ध्वस्त हो गयी. बगाल-बुटन-डूभा बांध का जलस्तर अचानक बढ़ने से नदी का बहाव तेज हो गया. पानी के दबाव में जर्जर पुलिया टूट गयी.

गांव तक पहुंचने का रास्ता बंद

पुलिया टूटने के बाद तुरिया भंडार होते हुए खुरा गांव जाने वाला मुख्य रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है. इससे करीब 300 घरों में रहने वाली लगभग 1500 की आबादी का प्रखंड मुख्यालय और आसपास के इलाकों से संपर्क कट गया है. गांव तक पहुंचने का रास्ता बंद होने के कारण ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं.

स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्थिति गंभीर

संपर्क मार्ग टूटने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति सामने आयी. प्रसव पीड़ा से परेशान एक महिला को अस्पताल ले जाने का रास्ता नहीं मिला. बाढ़ और टूटी पुलिया के कारण कोई वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका. आखिरकार महिला ने गांव के ही एक बंद कमरे में स्थानीय महिलाओं की मदद से बच्चे को जन्म दिया. ग्रामीणों के अनुसार, जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं. इस घटना ने गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं.

20 साल से जर्जर थी पुलिया

ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया का निर्माण वर्ष 2005-06 में हुआ था. इसके बाद करीब दो दशक बीत जाने के बावजूद इसकी कभी समुचित मरम्मत नहीं हुई. पुलिया लंबे समय से जर्जर थी और ग्रामीण लगातार इसकी मरम्मत या नयी पुलिया बनाने की मांग करते रहे थे.

नहीं झेल सकी तेज पानी का दबाव

ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते पुलिया की मरम्मत नहीं होने के कारण आज पूरा गांव संकट में है. तेज पानी का दबाव जर्जर पुलिया नहीं झेल सकी और वह पूरी तरह ध्वस्त हो गयी.

ग्रामीणों ने मांगा डायवर्सन

पुलिया टूटने के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से तत्काल अस्थायी वैकल्पिक मार्ग यानी डायवर्सन बनाने की मांग की है, ताकि गांव में राशन, दवा और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा सके.

स्थायी पुलिया की भी मांग

ग्रामीणों ने जल्द उच्चस्तरीय जांच कर मजबूत और स्थायी पुलिया का निर्माण शुरू कराने की भी मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे.

स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चे

ग्रामीण गणेश सिंह ने कहा कि पुलिया टूटने का सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है. रास्ता पूरी तरह बंद होने और चारों तरफ बाढ़ का पानी होने के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पढ़ाई और परीक्षा के महत्वपूर्ण समय में बच्चों का घरों में रहने को मजबूर होना चिंता की बात है. यदि जल्द वैकल्पिक रास्ता नहीं बनाया गया, तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है.

राशन और दवा की आपूर्ति पर भी संकट

ग्रामीण नवल किशोर सिंह ने बताया कि खुरा गांव रोजमर्रा की जरूरतों के लिए स्थानीय बाजार पर निर्भर है. रास्ता बंद होने के बाद राशन, सब्जी, दूध और दवाइयां जैसी जरूरी चीजें गांव तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है.

ग्रामीणों के घरों में रखा राशन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. ऐसे में यदि संपर्क जल्द बहाल नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में खाद्य सामग्री का संकट गहरा सकता है.

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एंबुलेंस भी नहीं पहुंच सकती गांव

ग्रामीण रामजन्म बैठा ने कहा कि गांव तक चार पहिया वाहन और एंबुलेंस पहुंचने के सभी रास्ते बंद हो गये हैं. ऐसे में किसी बुजुर्ग, बच्चे या गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में गांव के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति को लेकर डर बना हुआ है. प्रशासन को जल्द से जल्द वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था करनी चाहिए.

गांव की बदहाल स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था

ग्रामीण नंद किशोर सिंह ने बताया कि टूटी पुलिया और उफनते पानी के कारण कोई वाहन गांव में आने को तैयार नहीं था. प्रसव पीड़ा से परेशान सुनीता को अस्पताल ले जाना संभव नहीं हो सका.

इसके बाद स्थानीय महिलाओं की मदद से गांव में ही प्रसव कराया गया. राहत की बात है कि जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना गांव की बदहाल स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने रखती है.

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By Chandra shekhar singh

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