15 हजार से अधिक मकान मालिक नहीं जमा कर रहे होल्डिंग टैक्स

वर्ष 2016 तक मेदिनीनगर नगर परिषद के रूप में कार्यरत था.

मेदिनीनगर. राज्य सरकार द्वारा शहरी निकायों की राजस्व वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू झारखंड राज्य नगरपालिका अधिनियम, 2006 के तहत नगर क्षेत्र के प्रत्येक मकान मालिक को होल्डिंग टैक्स जमा करना अनिवार्य किया गया है. इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी बनाते हुए सरकार ने वर्ष 2016 से सेल्फ असेसमेंट फार्म (सैफ फार्म) प्रणाली लागू की, जिसके माध्यम से आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के कर निर्धारण का कार्य किया जाता है. नगर निगम बनने के बाद बढ़ा दायरा वर्ष 2016 तक मेदिनीनगर नगर परिषद के रूप में कार्यरत था. लेकिन शहर के विस्तार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने वर्ष 2017 में 10 पंचायतों को मिलाकर मेदिनीनगर नगर निगम का गठन किया. इसके बाद 2018 में निगम चुनाव संपन्न हुआ और वित्तीय वर्ष 2019 से निगम क्षेत्र के नवजोड़े गए वार्डों में भी होल्डिंग टैक्स वसूली की प्रक्रिया शुरू की गयी. सैफ फार्म से होता है टैक्स निर्धारण नगर निगम प्रशासन के अनुसार, प्रत्येक मकान मालिक को अपने भवन की विस्तृत जानकारी जैसे आकार, उपयोग (आवासीय या व्यवसायिक), निर्माण सामग्री, मंजिलों की संख्या आदि सैफ फार्म में दर्ज करनी होती है. इसी विवरण के आधार पर होल्डिंग टैक्स का निर्धारण किया जाता है. अब तक केवल 34,049 हाउस होल्डर ने भरा सैफ फार्म नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक 35 वार्डों में कुल 34,049 हाउस होल्डरों ने सैफ फार्म भरकर टैक्स जमा किया है. जबकि निगम क्षेत्र में अनुमानतः 50 हजार से अधिक मकान मालिक हैं. इसका अर्थ है कि करीब 15 से 16 हजार मकान मालिक अब भी टैक्स दायरे से बाहर हैं. नये वार्डों में टैक्स वसूली की स्थिति सबसे खराब नगर निगम प्रशासन का कहना है कि पुराने वार्डों में टैक्स वसूली की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन जो पंचायत वर्ष 2017 में निगम में शामिल किये गये थे, वहां के लोग अब भी होल्डिंग टैक्स के प्रति उदासीन हैं. निगम की स्वीकारोक्ति है कि नये क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और प्रशासनिक पहल की सुस्ती के कारण अपेक्षित सफलता नहीं मिल पायी है. राजस्व वृद्धि पर पड़ा असर निगम का कहना है कि शहर के विस्तार और नये भवनों के निर्माण के बावजूद होल्डिंग टैक्स से होने वाली आय में वृद्धि नहीं हुई है. इससे सरकार को राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है. निगम क्षेत्र की आबादी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 1.60 लाख थी, जो अब कहीं अधिक हो चुकी है. बढ़ती आबादी के अनुपात में टैक्स संग्रह में वृद्धि नहीं होना प्रशासनिक चिंता का विषय बन गया है. स्पैरो सॉफ्टेक को सौंपा गया है काम राज्य सरकार ने नगर निगमों में पारदर्शी टैक्स वसूली सुनिश्चित करने के लिए स्पैरो सॉफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड नामक एजेंसी को कार्यान्वयन की जिम्मेदारी दी है. एजेंसी के माध्यम से सैफ फार्म की ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों प्रक्रियाएं संचालित की जा रही हैं. निगम ने शुरू की समीक्षा निगम प्रशासन अब टैक्स वसूली प्रक्रिया की समीक्षा कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही एक विशेष अभियान चलाकर बकायेदार मकान मालिकों को नोटिस भेजा जायेगा. इसके साथ ही नये क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना है, ताकि सभी मकान मालिक टैक्स दायरे में आयें.

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Author: ANUJ SINGH

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