कुंदन चौरसिया की रिपोर्ट
मोहम्मदगंज (पलामू). जिले के मोहम्मदगंज प्रखंड की स्थापना 23 नवंबर 2013 को हुई थी. इसके बाद ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों द्वारा कई सरकारी भवनों का निर्माण कराया गया, लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से कई भवन निर्माण के बाद से ही अनुपयोगी पड़ा हैं. कुछ भवन उपयोग के इंतजार में शोभा की वस्तु बने हुए हैं, तो कुछ देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहे हैं. इन भवनों के निर्माण पर खर्च हुई सरकारी राशि का लाभ आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है.
पंचायत सचिवालय बना डेड एसेट
मोहम्मदगंज पंचायत सचिवालय इसका प्रमुख उदाहरण है. कुछ वर्षों तक संचालन के बाद पंचायत सचिवालय बंद हो गया. भवन में रखे कई उपकरणों की चोरी भी हो चुकी है. वर्तमान में इसका उपयोग कभी-कभार बरात ठहराने के लिए किया जाता है. ग्रामीणों ने पंचायत सचिवालय के नियमित संचालन को लेकर तत्कालीन बीडीओ प्रभाकर ओझा से शिकायत की थी. शिकायत के बाद उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को सचिवालय का नियमित संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया था, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ. फिलहाल पंचायत का संचालन सिंचाई कॉलोनी स्थित सामुदायिक भवन से किया जा रहा है.
आठ साल बाद भी शुरू नहीं हुआ बस पड़ाव
मोहम्मदगंज साप्ताहिक बाजार परिसर में बनाया गया सार्वजनिक बस पड़ाव भी अनुपयोगी पड़ा है. निर्माण के करीब आठ वर्ष बाद भी इसका नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका. परिसर में यात्रियों और व्यवसायियों की सुविधा के लिए बनाई गई कई दुकानें भी बंद पड़ी हैं. इससे एक ओर सरकारी संपत्ति का उपयोग नहीं हो रहा है, वहीं दूसरी ओर दुकानों से मिलने वाला राजस्व भी सरकार को नहीं मिल रहा.
स्वास्थ्य केंद्र से लेकर पैक्स गोदाम तक बदहाल
वन विभाग कार्यालय से सटे राजस्व भवन की स्थिति भी उपयोग के लिहाज से संतोषजनक नहीं है.वहीं भाली गांव में निर्मित स्वास्थ्य केंद्र भवन भी लंबे समय से अनुपयोगी पड़ा है. दूसरी ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। स्वास्थ्य केंद्र भवन में लगे सोलर प्लेट और पंखे चोरी हो जाने से इसकी निर्माण व उपयोगिता पर सवाल खड़े है.
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सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठ रहा सवाल
स्वास्थ्य केंद्र परिसर में टेस्ट लैब का भवन अधूरा पड़ा है. इसके ठीक बगल में बना पैक्स गोदाम भी निर्माण के करीब दो वर्ष बाद तक चालू नहीं हो सका है. किसानों के लिए करीब पांच वर्ष पहले विभिन्न पंचायतों में बनाए गए शीतगृह केंद्रों का संचालन भी पूरी तरह ठप है. देखरेख के अभाव में कई भवन खंडहर में तब्दील होने की कगार पर पहुंच गए हैं. नियमित संचलन व देखरेख का अभाव के कारण भवन असुरक्षित होकर डेड पड़े है.
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स्कूलों में भी कई भवन उपयोग से बाहर
शिक्षण संस्थानों में भी सरकारी राशि से बनाए गए कई भवनों का अपेक्षित उपयोग नहीं हो रहा है. हाल के वर्षों में बनाए गए लैब भवन समेत कई अन्य भवनों की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं. मोहम्मदगंज स्तरोन्नत उच्च विद्यालय में पड़ताल के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां भवन निर्माण के बावजूद उनका समुचित उपयोग नहीं हो रहा है.
पुराने सरकारी भवन भी खंडहर में तब्दील
प्रखंड गठन से पहले उत्तर कोयल परियोजना परिसर में बना अस्पताल, ऊंची पहाड़ी पर स्थित आइबी, पुराना थाना भवन और कई सरकारी क्वार्टर भी लंबे समय से उपेक्षित हैं. देखरेख के अभाव में इन भवनों की हालत लगातार खराब होती जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी भवनों का निर्माण जनता की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है. लेकिन मोहम्मदगंज में कई भवन निर्माण के बाद ही अपने उद्देश्य से भटक गए. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि भवनों का उपयोग नहीं हो रहा है तो यह सरकारी राशि के समुचित उपयोग पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. ग्रामीणों ने अनुपयोगी भवनों की समीक्षा कर उन्हें संबंधित विभागों के माध्यम से जनहित में उपयोग में लाने तथा क्षतिग्रस्त भवनों के संरक्षण की मांग की है. दो साल पूर्व प्रखंड भवन में स्थापित लाखो की आरओ उपकरण दिखावा बनी है.
