पांकी में ओवरलोड कोयला परिवहन पर विधायक ने उठाये सवाल, आंदोलन की चेतावनी

पांकी विधायक डॉ कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने ओवरलोड कोयला लदे हाइवा के अवैध परिवहन और पुलिस की मिलीभगत पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

प्रतिनिधि, मेदिनीनगर: पांकी विधानसभा क्षेत्र में ओवरलोड और कथित अवैध कोयला परिवहन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी है. पांकी विधायक डॉ कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने रविवार को प्रेस वार्ता कर पांकी थाना प्रभारी की कार्यशैली पर सवाल उठाये. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की निगरानी और लिखित शिकायत के बावजूद जब्त हाइवा का गायब होना गंभीर मामला है.

विधायक के अनुसार 12 सितंबर की दोपहर ओवरलोड कोयला लदे दो हाइवा पकड़े गये थे. एक मंगलपुर के पास पंचर हो गया, जबकि दूसरे को पांकी थाना लाया गया. लिखित शिकायत के बाद इसे थाना से करीब 200 मीटर दूर जरही चौक के पास खड़ा कराया गया था. इसकी निगरानी के लिए चौकीदार भी तैनात था. इसके बावजूद हाइवा रात में वहां से चला गया.

डॉ मेहता ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस और कोयला कारोबारियों के बीच मिलीभगत है. उन्होंने दावा किया कि पांकी थाना के सामने से रोज 150 से 200 ओवरलोड कोयला लदे हाइवा गुजरते हैं. विधायक ने चेतावनी दी कि अवैध कोयला परिवहन पर रोक नहीं लगी और दोषी थाना प्रभारी पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे.

कागजात सही मिलने पर छोड़ा गया : थाना प्रभारी

आरोपों के संबंध में पांकी थाना प्रभारी दीपक कुमार सिंह ने बताया कि हाइवा के कागजात सही पाये जाने के बाद उसे छोड़ दिया गया था.

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By चंद्रशेखर सिंह

चंद्रशेखर सिंह प्रभात खबर से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने लंबे समय से पत्रकारिता करियर में क्राइम, सामाजिक मुद्दों और राजनीति से जुड़े विषयों पर व्यापक रूप से काम किया है. मेदिनीनगर (पलामू) में जमीनी स्तर की पत्रकारिता में इनकी खास पकड़ रही है. समाज से जुड़े महत्वपूर्ण और अनदेखे मुद्दों को सामने लाने, आम लोगों की समस्याओं को आवाज देने और सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाने के लिए वह जाने जाते हैं. अपराध और राजनीति से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक बदलाव और जनहित के मुद्दों पर भी लगातार काम किया है. क्राइम रिपोर्टिंग, सामाजिक सरोकार और राजनीतिक पत्रकारिता उनके प्रमुख कार्यक्षेत्र रहे हैं. तीन दशकों के अनुभव के दौरान उन्होंने बदलते मीडिया परिदृश्य और पत्रकारिता के तौर-तरीकों को करीब से देखा और समझा है. उनकी पत्रकारिता में जमीनी अनुभव, सामाजिक मुद्दों की समझ और तथ्यपरक रिपोर्टिंग को विशेष महत्व मिलता है.

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