परमात्मा की भक्ति में ही मानव जीवन की सार्थकता : देवी चंद्रकला

रेड़मा ठाकुरबाड़ी व रजवाडीह में रामचरित मानस पाठ महायज्ञ संपन्न

रेड़मा ठाकुरबाड़ी व रजवाडीह में रामचरित मानस पाठ महायज्ञ संपन्न मेदिनीनगर. चैत नवरात्र के अवसर पर सदर प्रखंड के रजवाडीह के समतटांड स्थित हनुमान मंदिर में श्रीरामचरित मानस नवाह् परायण महायज्ञ का 11वां अधिवेशन सम्पन्न हुआ. वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन यज्ञ किया गया. आयोजन समिति ने बताया कि वाराणसी से आये पंडित श्यामल मिश्र और मानस माधुरी राजकुमारी ने नौ दिनों तक सागर्भित प्रवचन दिया. इसी क्रम में शहर के रेड़मा ठाकुरबाड़ी परिसर में आयोजित महायज्ञ का 59वां अधिवेशन भी संपन्न हुआ. अयोध्या से पधारी देवी चंद्रकला ने श्रीरामचरित मानस के आधार पर भगवान श्रीराम की पावन कथा का रसपान कराया. महायज्ञ के अंतिम दिन शुक्रवार की संध्या में उन्होंने कथा के दौरान मानस के कई प्रसंगों की चर्चा बड़े ही मार्मिक ढंग से की. रामनवमी के अवसर पर प्रभु श्रीराम के अवतरण के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करना, दुष्टों का संहार कर संतों की रक्षा करना ही प्रभु श्रीराम का अवतरण था. उन्होंने यह भी बताया कि प्रभु श्रीराम ने मर्यादा और आदर्श सिद्धांतों का पालन करते हुए समाज को जनकल्याण का संदेश दिया. इस संदेश को आत्मसात कर समाज की बेहतरी और जीवन के कल्याण के लिए पुरुषार्थ करना चाहिए. देवी चंद्रकला ने कहा कि ईश्वर की असीम कृपा से दुर्लभ मानव शरीर प्राप्त हुआ है और परमात्मा की भक्ति में ही जीवन की सार्थकता है. उन्होंने मानस के आधार पर प्रभु श्रीराम की सेवा और भक्ति के महत्व की चर्चा करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी.

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Published by: Akarsh aniket

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