पलामू से शिवेंद्र कुमार की रिपोर्ट
Palamu News: पलामू जिले के सरकारी प्लस टू विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है. शहर के प्रतिष्ठित गिरिवर प्लस टू उच्च विद्यालय के एक शिक्षक पर छात्रों और उनके अभिभावकों से विभिन्न कार्यों के नाम पर अवैध रूप से पैसे वसूलने के आरोप लगे हैं. शिक्षक के द्वारा अवैध वसूली करने का वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक में हलचल मच गयी है. मामले को गंभीर मानते हुए जिला उपायुक्त ने जांच और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू का निर्देश दिया है.
बिना हाजिरी परीक्षा दिलाने के नाम पर पैसे लेने का आरोप
जानकारी के अनुसार विद्यालय में कार्यरत रसायन शास्त्र के स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक संदीप जायसवाल पर यह आरोप लगाया गया है कि जो छात्र स्कूल में नामांकन तो लेते हैं, लेकिन नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित नहीं हो पाते, उनसे परीक्षा में शामिल कराने के एवज में प्रति छात्र 10 हजार रुपये तक की मांग की जाती है. सूत्रों का कहना है कि इस व्यवस्था को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच लंबे समय से असंतोष था, लेकिन अब मामला खुलकर सामने आने के बाद चर्चा का विषय बन गया है.
एडमिशन फॉर्म और कागजात के लिए भी वसूले जाते थे पैसे
आरोपों के मुताबिक, केवल अनुपस्थित छात्रों से ही नहीं, बल्कि नियमित रूप से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों से भी विभिन्न कार्यों के लिए पैसे लिये जाते थे. छात्रों का आरोप है कि एक वर्ष के दस्तावेज जमा करने के लिए 400 रुपये और दो वर्षों के लिए 800 रुपये की मांग की जाती थी. हालांकि, कई बार अभिभावकों की ओर से अनुरोध और मिन्नतें करने के बाद दो साल के दस्तावेज जमा करने के लिए 500 रुपये लेकर काम कर दिया जाता था. हाल ही में एक छात्रा के अभिभावक से दो वर्ष के कागजात जमा करने के बदले 500 रुपये लेने का मामला भी सामने आया है. इसके अलावा कई विद्यार्थियों से फॉर्म भरने के नाम पर 100-100 रुपये लिये जाने का आरोप लगाया गया है.
छात्रों के सामने शिक्षक ने बतायी थी अपनी मजबूरी
विद्यार्थियों के अनुसार जब उन्होंने पैसे लिये जाने को लेकर सवाल उठाया, तो संबंधित शिक्षक ने यह दलील दी कि बिना नियमित उपस्थिति के परीक्षा दिलाना जोखिम भरा और परेशानी वाला काम है, इसलिए पैसे लिये जाते हैं. इतना ही नहीं, छात्रों का दावा है कि शिक्षक ने यह भी कहा था कि पिछले वर्ष इस प्रकार की अनियमितता की जानकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी तक पहुंच गयी थी, जिसके बाद उनका वेतन रोक दिया गया था.
डीईओ को 20 हजार रुपये रिश्वत देने का दावा भी चर्चा में
मामले को और गंभीर बनाते हुए छात्रों ने आरोप लगाया है कि शिक्षक ने स्वयं यह स्वीकार किया था कि रुका हुआ वेतन दोबारा शुरू कराने के लिए उन्हें जिला शिक्षा पदाधिकारी को 20 हजार रुपये देने पड़े थे. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. जिला शिक्षा विभाग की ओर से भी इस संबंध में किसी प्रकार की पुष्टि नहीं की गयी है.
आरोपी शिक्षक ने सभी आरोपों को बताया बेबुनियाद
गिरिवर प्लस टू उच्च विद्यालय के शिक्षक संदीप जायसवाल ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी छात्र या अभिभावक से कोई पैसा नहीं लिया है. उनके खिलाफ लगाये गये सभी आरोप निराधार और गलत हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर उनकी छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं.
प्राचार्य ने विभागीय कार्रवाई के लिए भेजा पत्र
विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य घनश्याम गुप्ता ने कहा कि इस मामले में संबंधित शिक्षक के खिलाफ उचित विभागीय कार्रवाई के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र भेज दिया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे मामले में उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और जो भी कार्रवाई होगी, वह विभागीय स्तर पर की जायेगी.
शिक्षक के खिलाफ तैयार होगा आरोप पत्र: डीईओ
जिला शिक्षा पदाधिकारी सौरव प्रकाश ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है. प्रारंभिक जांच के आधार पर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी और यदि आरोप सही पाये जाते हैं, तो दोषी के खिलाफ सख्त कदम उठाये जायेंगे.
डीसी ने जतायी नाराजगी, कहा – होगी कठोर कार्रवाई
पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में इस प्रकार की शिकायतें बेहद गंभीर और निंदनीय हैं. उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और दोषी पाये जाने पर त्वरित तथा कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी.
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शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस प्रकरण ने सरकारी विद्यालयों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिये हैं. जिन संस्थानों को छात्रों के भविष्य का आधार माना जाता है, वहां यदि कागजात जमा कराने और परीक्षा दिलाने जैसे कार्यों के लिए पैसों के आरोप लगने लगें, तो चिंता स्वाभाविक है. आखिर शिक्षा का मंदिर अगर रसीद की जगह मोलभाव का केंद्र बन जाये, तो अभिभावकों का भरोसा डगमगाना तय है. फिलहाल सभी की निगाहें विभागीय जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.
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