पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट
Palamu News: पलामू के चैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर में हाल के दिनों में हुए संवेदनशील विवाद पर 5 जून 2026 को भाकपा माले की जनसभा प्रस्तावित है. भाजपा के वरिष्ठ नेता और किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ज्योतिश्वर सिंह ने जिले के उपायुक्त (डीसी) से इस जनसभा पर रोक लगाने की मांग की है. उन्होंने रामपुर के इस विवाद पर प्रशासन, राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को केवल कानून-व्यवस्था का मामला मानने से इनकार करते हुए इसे प्रशासनिक निष्पक्षता, राजनीतिक जिम्मेदारी और न्यायिक संतुलन की कसौटी बताया है. ज्योतिरीश्वर सिंह ने पलामू पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासन को तात्कालिक दबाव में निर्णय लेने के बजाय विवाद के मूल कारणों तक पहुंचने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने पुलिस को “स्वान दृष्टि” छोड़कर “सिंह दृष्टि” अपनाने की सलाह दी.
मूल कारण पर प्रहार करे प्रशासन
भाजपा नेता ने न्याय के सिद्धांतों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति सिंह पर लाठी से हमला करता है तो सिंह लाठी पर नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले पर प्रहार करता है, क्योंकि दोष लाठी का नहीं बल्कि उसे चलाने वाले का होता है. इसके विपरीत स्वान केवल लाठी के पीछे दौड़ता है और वास्तविक कारण को नजरअंदाज कर देता है. उन्होंने आरोप लगाया कि रामपुर मामले में प्रशासन केवल सतही कार्रवाई कर रहा है. उनके अनुसार जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही एक पक्ष विशेष के लोगों के हथियारों के लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा कर दी गई, जो निष्पक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता.
बिना अंतिम निष्कर्ष के कार्रवाई उचित नहीं
ज्योतिरीश्वर सिंह ने कहा कि किसी भी मामले में अंतिम जांच रिपोर्ट या न्यायिक निष्कर्ष आने से पहले किसी पक्ष को दोषी मान लेना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि प्रशासन किसी दबाव में काम कर रहा है. उनका कहना था कि विवाद की जड़ में मौजूद जमीन संबंधी मुद्दों की गहराई से जांच होनी चाहिए. यदि मूल कारणों का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में भी इस तरह की स्थितियां उत्पन्न होती रहेंगी.
महाभारत का उदाहरण देकर रखा पक्ष
अपने बयान में उन्होंने ऐतिहासिक और दार्शनिक संदर्भों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि महाभारत युद्ध के बाद कुरुक्षेत्र में हुई तबाही को देखकर किसी एक पक्ष को पीड़ित मान लेना पर्याप्त नहीं है. किसी भी संघर्ष में वास्तविक स्थिति का आकलन व्यापक तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी घटना में जान-माल की क्षति होना और दोषी का निर्धारण होना दो अलग-अलग विषय हैं. प्रशासन को केवल तात्कालिक परिणाम देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि निष्पक्ष जांच के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना चाहिए.
भाजपा विधायक के बयान पर भी जताई असहमति
ज्योतिरीश्वर सिंह ने स्थानीय स्तर पर हुई राजनीतिक प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पलामू लंबे समय से भाजपा का मजबूत क्षेत्र रहा है, इसलिए यहां किसी भी संवेदनशील मामले पर संतुलित और जिम्मेदार बयान की अपेक्षा की जाती है. उन्होंने कहा कि घटना के शुरुआती चरण में ही स्थानीय भाजपा विधायक आलोक चौरसिया के एकतरफा बयानों से समाज में भ्रम और असंतुलन का संदेश गया. ऐसे मामलों में राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को संयमित भूमिका निभानी चाहिए.
भाजपा नेतृत्व से जांच दल भेजने की मांग
भाजपा नेता ने पार्टी के प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है. उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, अर्जुन मुंडा और अमित तिवारी से आग्रह किया कि जिस प्रकार अन्य संवेदनशील मामलों में पार्टी की ओर से जांच दल भेजे गए हैं, उसी प्रकार रामपुर मामले की वस्तुस्थिति जानने के लिए भी एक उच्चस्तरीय जांच दल भेजा जाए.
प्रस्तावित जनसभा पर रोक लगाने की मांग
रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में व्याप्त तनाव का उल्लेख करते हुए ज्योतिरीश्वर सिंह ने प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि जानकारी के अनुसार 5 जून को रामपुर में भाकपा माले की एक जनसभा प्रस्तावित है. उन्होंने आशंका जताई कि मौजूदा संवेदनशील माहौल में किसी भी बड़े राजनीतिक आयोजन से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. इसलिए उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि स्थिति सामान्य होने तक ऐसे आयोजनों पर विचार किया जाए और आवश्यक कदम उठाए जाएं.
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दोषी को सजा, निर्दोष को न्याय मिले
अपने बयान के अंत में ज्योतिरीश्वर सिंह ने कहा कि उनकी स्पष्ट मान्यता है कि दोषी व्यक्ति को कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए, लेकिन किसी भी निर्दोष को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रशासन का दायित्व केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करना भी है. निष्पक्ष जांच, संतुलित निर्णय और सामाजिक सौहार्द की रक्षा ही इस पूरे मामले का स्थायी समाधान हो सकता है.
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