झारखंड के स्कूलों की बदहाली पर ज्यां द्रेज चिंतित, एमडीएम और शिक्षकों की कमी पर उठाये सवाल

अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने झारखंड के स्कूलों का दौरा कर शिक्षा और एमडीएम की बदहाल स्थिति पर चिंता जताई और सरकार से सुधार की मांग की है.

सतबरवा से रमेश रंजन की रिपोर्ट

पलामू. देश के अर्थशास्त्री और सामाजिक शोधकर्ता तथा रांची विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्रोफेसर ज्यां द्रेज ने मंगलवार को सतबरवा प्रखंड के छह प्राइमरी और मिडिल स्कूलों का निरीक्षण किया. उन्होंने विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों और मध्याह्न भोजन (एमडीएम) व्यवस्था का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान स्कूलों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कई व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत बतायी.

ज्यां द्रेज ने राजकीय मध्य विद्यालय धावाडीह, न्यू प्राथमिक विद्यालय चिकनका टोला, प्राथमिक विद्यालय हरिजन टोला रेवारातु, उत्क्रमित मध्य विद्यालय हुड़मुड़, राजकीयकृत मध्य विद्यालय फुलवरिया और प्राथमिक विद्यालय कुकुर बंधवा का निरीक्षण किया.

शौचालय, एमडीएम और जर्जर भवन पर जतायी नाराजगी

निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्कूलों में शौचालय की स्थिति, एमडीएम, भवन की जर्जरता, शिक्षकों की कमी और बच्चों की कम उपस्थिति का जायजा लिया. इन समस्याओं को लेकर उन्होंने नाराजगी जतायी. उन्होंने शिक्षकों और बच्चों से नियमित रूप से विद्यालय आने की अपील की.

शैक्षणिक व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक

ज्यां द्रेज ने कहा कि पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सरकारी स्कूलों में एमडीएम को लेकर सर्वे किया जा रहा है. झारखंड के स्कूलों में एमडीएम और शैक्षणिक व्यवस्था की स्थिति काफी चिंताजनक है. सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है.

एक महीने से एमडीएम बंद

ज्यां द्रेज ने बताया कि राजकीयकृत मध्य विद्यालय फुलवरिया में एमडीएम फंड नहीं मिलने के कारण करीब एक महीने से बच्चों के भोजन की व्यवस्था नहीं हो पा रही है. उन्होंने इसे गंभीर मामला बताया. उन्होंने कहा कि कई विद्यालयों में मरम्मत के अभाव में छत से पानी टपक रहा है. इससे बच्चों और शिक्षकों को परेशानी हो रही है.

एमडीएम संचालन के लिए माता समिति का गठन

पहले एमडीएम संचालन के लिए माता समिति का गठन किया गया था. नयी व्यवस्था के तहत एमडीएम की राशि वेंडर के खाते में भेजी जानी है. यह व्यवस्था अप्रैल 2026 से लागू होनी थी, लेकिन अब तक लागू नहीं हो सकी है. समिति और शिक्षकों ने बताया कि एमडीएम संचालन में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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40 फीसदी स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक

ज्यां द्रेज ने कहा कि झारखंड में करीब 40 प्रतिशत सरकारी प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक शिक्षक पदस्थापित हैं. उनके अनुसार, दूसरे राज्यों में ऐसी स्थिति नहीं है. उन्होंने सुझाव दिया कि प्राथमिक स्कूलों के लिए संकुल स्तर पर और मिडिल स्कूलों में एक-एक क्लर्क की नियुक्ति की जानी चाहिए. साथ ही झारखंड के सभी सरकारी स्कूलों में एमडीएम और विकास फंड की राशि नियमित रूप से उपलब्ध कराने की जरूरत है.

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सरकारी बहाली में पारदर्शिता की जरूरत

ज्यां द्रेज ने सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की बहाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं. उन्होंने सरकार और चयन आयोग से सभी सरकारी प्रतियोगिताओं में पारदर्शी तरीके से चयन प्रक्रिया पूरी करने की अपील की.

मौके पर दिल्ली विश्वविद्यालय के वी. ओम, पछाठी सिंह और मनोज कुमार समेत अन्य लोग मौजूद थे.

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By Chandra shekhar singh

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