अडानी को जमीन मिल सकती है, तो यहां के उद्यमियों को क्यों नहीं

औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर आयोजित चर्चा में वित्त मंत्री ने कहा

औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर आयोजित चर्चा में वित्त मंत्री ने कहा

प्रतिनिधि, मेदिनीनगर

चियांकी स्थित ज्योति प्रकाश महिला बीएड कॉलेज में रविवार को पलामू में औद्योगिक विकास की संभावनाओं को लेकर परिचर्चा की गयी. इसका आयोजन पलामू चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज एवं फेडरेशन आफ झारखंड चेंबर आफ कामर्स एवं इंडस्ट्रीज के संयुक्त तत्वाधान में हुआ. कार्यक्रम में राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, पलामू सांसद बीडी राम, पांकी विधायक डॉ शशिभूषण मेहता ने भाग लिया. इसकी अध्यक्षता पलामू चेंबर अध्यक्ष आनंद शंकर ने की. मौके पर वित्त मंत्री श्री किशोर ने कहा कि जब अडानी को जमीन मिल सकती है. तो यहां के लोगों को उद्योग लगाने के लिए क्यों नहीं मिल सकती है. उन्होंने कहा कि यहां पर जो लोग उद्योग लगाना चाहते हैं सरकार जमीन मुहैया करायेगी, साथ ही सुविधा भी देगी. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार का पूरा फोकस रुलर इकोनॉमी को मजबूत करना है. गांव में पर कैपिटा इनकम बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. राज्य सरकार के द्वारा पानी, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से जो सहयोग मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पा रहा है. झारखंड सरकार का केंद्र सरकार पर 30 हजार करोड़ बकाया है. मंत्री ने कहा कि झारखंड में उनकी सरकार नहीं है, इसलिए नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पलामू के सांसद के नेतृत्व में प्रधानमंत्री से मिलकर झारखंड का बकाया राशि की मांग करेंगे. उन्होंने कहा कि झारखंड का परकैपिटा इनकम एक लाख आठ हजार है, जबकि पलामू का परकैपिटा इनकम 58 हजार है. पलामू को आर्थिक रूप से सुदृढ़ किया जायेगा. यह उनका कमिटमेंट है. उन्होंने कहा कि फरवरी में बजट के पहले झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स, पलामू चेंबर ऑफ कॉमर्स व गढ़वा चैंबर ऑफ़ कॉमर्स से बात किया जायेगा. यदि बजट में कोई जरूरत होगी. तो उसके अनुसार बजट में प्रावधान भी किया जायेगा. पलामू पहले काफी पिछड़ा हुआ था. अभी यहां के लोगों की सामाजिक मानसिकता बदली है. नौजवान शिक्षित हुए हैं. इसलिए यहां उद्योग लगाने के बारे में सोच रहे हैं. पहले सरकार के द्वारा सुदूरवर्ती इलाके में रोड, पुल, पुलिया बनाया गया है. लेकिन उद्योग एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है. इस पर ध्यान दिया जायेगा. परिचर्चा में कई व्यवसायियों ने बात रखी. मौके पर एफजेसीसीआई के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, पूर्व मेयर अरुणा शंकर, व्यवसायी संघ जिलाध्यक्ष प्रभात अग्रवाल, चेंबर के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष उदय शंकर दुबे सहित काफी संख्या में व्यवसायी व चेंबर के सदस्य मौजूद थे.

राज्य सरकार की उदासीनता के कारण मामला लटका : सांसद

पलामू सांसद बीडी राम ने कहा कि उद्योग के लिए राज्य सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करा रही है, यही कारण है कि पलामू से हवाई यात्रा शुरू नहीं हो पा रही है. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की उदसीनता के कारण चियांकी हवाई अड्डा का मामला लटका हुआ है. झारख्ंड सरकार दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. सांसद ने कहा कि राइस मिल के लिए ढाई एकड़ जमीन सरकार से मांगी गयी थी. लेकिन अभी तक नहीं उपलब्ध कराया गया. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उद्योग धंधा लगाने पे प्रति राज्य सरकार का रवैया ढुलमुल है. उन्होंने औद्योगिक कॉरिडोर का जिक्र करते हुए कहा कि भवनाथपुर में 670 एकड़ जमीन राज्य सरकार को दी जा रही थी. लेकिन राज्य सरकार ने औद्योगिक कोरीडोर बनाने के लिए बोकारो के लिए प्रतिवेदन भेजा है.

औद्योगिक विकास में जटिलता को दूर किया जाना चाहिए: विधायक

पांकी विधायक शशिभूषण मेहता ने कहा कि औद्योगिक विकास में आने वाली जटिलता को दूर किया जाना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा उद्योग लग सके. यहां औद्योगिक विकास की असीम संभावना है. सरकार के द्वारा यदि पहल किया जायेगा, तो यहां के युवा को एक उड़ान मिलेगा. इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा. उन्होंने कहा कि यहां हवाई अड्डा चालू होना चाहिये. ताकि यहां पर लोगों को किसी भी उद्योग लगाने के लिए आसानी से आवाजाही कर सकें. पलामू में पोटेंशियल बहुत है. इससे पलामू का ज्यादा से ज्यादा विकास होगा.

राज्य गठन के 25 वर्षों के बाद भी पलामू में उद्यमियों के विकास नहीं: आंनद

पलामू चैंबर के अध्यक्ष आनंद शंकर ने कहा कि झारखंड राज्य गठन होने से औद्योगिक विकास व रोजगार सृजन की उम्मीद जगी थी, लेकिन राज्य गठन के 25 वर्षों के बाद भी इस दिशा में सरकार के द्वारा कारगर कदम नहीं उठाया गया. पलामू प्रमंडल जैसे पिछड़े इलाके में औद्योगिक विकास की असीम संभावना है. यहां उद्यमी भी उद्योग लगाने के प्रति उत्साहित है लेकिन सरकार के द्वारा उपेक्षित सहयोग व प्रोत्साहन नहीं दिया गया. रेहला में 40 वर्ष पूर्व बिरला ग्रुप का उद्योग स्थापित है. जो सफलता पूर्वक संचालित हो रही है, लेकिन पलामू में अन्य उद्योगों की स्थापना के लिए कभी नक्सली, तो कभी बिजली पानी जैसे संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है. रोजगार की तलाश में युवा दूसरे राज्यों में पलायन के लिए मजबूर हैं.

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By Akarsh aniket

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