छतरपुर,पलामू: पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड क्षेत्र स्थित चिराई गांव में रविवार को कृषक-वैज्ञानिक अंतर मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को जलवायु परिवर्तन से निपटने और कम बारिश की स्थिति में बेहतर फसल उत्पादन के उपाय बताए.
कम बारिश की स्थिति में वैकल्पिक खेती की सलाह
क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार ने बताया कि अल नीनो के प्रभाव से इस वर्ष जलवायु में बदलाव आया है, जिससे अपेक्षाकृत कम बारिश होने की संभावना है. इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने किसानों को टांड़नुमा (ऊंची) जमीन पर दलहन और सब्जी वर्गीय फसलों की खेती करने का परामर्श दिया. इसके अलावा, उन्होंने निचले खेतों में 100 से 115 दिनों में तैयार होने वाली धान की किस्मों को लगाने और प्रति कट्ठा 300 से 400 ग्राम पोटाश का उपयोग करने की सलाह दी.
मोटे अनाज की खेती पर जोर
कार्यक्रम में मौजूद प्रखंड तकनीकी प्रबंधक संजय कुमार ने किसानों को मडुआ, ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाजों की खेती पर विशेष ध्यान देने को कहा. उन्होंने बताया कि धान, गेहूं और मक्का की तुलना में मोटे अनाजों का बाजार मूल्य अधिक होता है, जिससे किसानों को बेहतर आमदनी मिल सकती है. साथ ही, कम पानी की उपलब्धता में भी मोटे अनाजों की अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है.
इस अवसर पर मुखिया रविंद्र राम, मदन यादव, विपिन कुमार यादव, अखिलेश प्रजापति और विकास कुमार सहित कई स्थानीय ग्रामीण व किसान उपस्थित थे.
