एमएमसीएच में पुलिस चौकी की स्थापना से बिचौलियों पर लगा अंकुश

एमएमसीएच में पुलिस चौकी की स्थापना से बिचौलियों पर लगा अंकुश

मेदिनीनगर ़ मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज (एमएमसीएच) में इस वर्ष जनवरी में स्थापित अस्थायी पुलिस पिकेट (चौकी) से कई बदलाव देखने को मिल रहा है. इससे जहां एक ओर कर्मियों के बीच सुरक्षा का माहौल कायम हुआ है. वहीं इसका सीधे तौर पर मरीजों को भी लाभ मिल रहा है. मरीजों को बिचौलियों से मुक्ति मिली है. अस्पताल परिसर में भीड़ में भी कमी आयी है. जिससे मरीजों को इलाज कराने में परेशानी नहीं होती है. एमएमसीएच में स्थापित पुलिस पिकेट का कमान सअनि कुमार नीरज को सौंपा गया. चौकी प्रभारी कुमार नीरज ने कई कदम उठाया. सबसे पहले अस्पताल परिसर में बिचौलियों के प्रवेश पर रोक लगाया गया. वहीं सहिया निजी अस्पताल संचालकों से मिलकर मरीजों को गुमराह करती थीं. वैसे सहियाओं के प्रवेश पर भी रोक लगायी गयी. ब्लड बैंक से बिचौलियों को हटाया गया. जिससे मरीजों को खासकर गरीब व असहाय मरीजों को बहुत हद तक राहत मिली है. पिकेट स्थापना के पहले बिचौलियों का था बोलबाला मरीजों ने बताया कि पिकेट स्थापित होने के पहले एमएमसीएच में बिचौलियों का बोलबाला था. भीतर हो या बाहर बिचौलियों से घिरा हुआ था. इस कार्य में सहिया भी संलिप्त रहती थीं. लोग निजी अस्पताल संचालकों से मिलकर मरीजों को बरगलाने काम करते थे. सहिया निजी क्लिनिक के संचालकों से मिलकर मरीजों को भड़काया जाता था. मरीजों को निजी क्लिनिक में जाने की सलाह दी जाती थी. जिससे मरीज दिग्भ्रमित हो जाते थे और सहिया के झांसे में आकर निजी क्लिनिक में जाते थे. एमएमसीएच के नर्स ही कर देते थे रेफर बताया जाता है कि मरीज जैसे ही आपातकालीन सेवा के लिए पहुंचते थे. मरीजों को चिकित्सकों से बिना जांच कराये ही मरीजों को चिकित्सकों के पास जाने ही नहीं दिया जाता था. गरीब व असहाय भोले भाले मरीजों को वहां ड्यूटी में लगे नर्स (एएनएम) द्वारा बाहर ही रेफर कर दिया जाता था. गरीब भोलेभाले मरीज उनके झांसे में आ जाते थे और निजी अस्पताल के जाल में फंस जाते थे. लेकिन पुलिस चौकी स्थापित होने के बाद व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है. जो भी मरीज एमएमसीएच पहुंचते हैं. पहले उनका रजिस्ट्रेशन किया जाता है. फिर चिकित्सकों द्वारा जांच किया जाता है. इसके बाद चिकित्सकों के मुताबिक इलाज किया जाता है. चिकित्सकों के द्वारा ही गंभीर स्थिति वाले मरीजों को रेफर किया जाता है. ब्लड बैंक को भी बिचौलियामुक्त कराया पुलिस चौकी स्थापित होने के बाद ब्लड बैंक भी बिचौलिया मुक्त हुआ है. पहले ब्लड बैंक बिचौलिया से घिरा हुआ था. जिससे रोगियों को ब्लड उपलब्ध नहीं हो पाता था. मिलता भी तो बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता था.

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By Shailesh ambashtha

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