गैंस की किल्लत से रोजी-रोटी पर संकट, ठेले वाले परेशान

ब्लैक में ढाई हजार में मिल रहा है एक सिलेंडर

ब्लैक में ढाई हजार में मिल रहा है एक सिलेंडर प्रतिनिधि : मेदिनीनगर ईरान-अमेरिका युद्ध का असर अब आम लोगों की ज़िंदगी पर साफ़ दिखाई देने लगा है. अंतरराष्ट्रीय तनाव ने रोज़मर्रा की ज़रूरतों को प्रभावित कर दिया है. सबसे बड़ी समस्या गैस सिलेंडर की किल्लत और महंगाई बन गयी है. पहले छोटे सिलेंडर में 100 रुपये प्रति किलो गैस भरी जाती थी, लेकिन अब यही कीमत 200 रुपये प्रति किलो हो गयी है. इतना ही नहीं, ब्लैक मार्केट में सिलेंडर 2500 रुपये तक बिक रहा है. छोटे दुकानदार और ठेले वाले, जो रोज़ी-रोटी के लिए खाना बनाकर बेचते हैं, सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं. उन्हें घर का सिलेंडर लेकर ठेले पर आना पड़ता है और काम खत्म होने के बाद उसी सिलेंडर से घर में बच्चों के लिए खाना बनाना पड़ता है. इससे परिवारों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है. पहले लोग 15 दिन में आसानी से सिलेंडर की बुकिंग कर लेते थे, लेकिन अब 35 दिन का इंतज़ार करना पड़ रहा है. जिन परिवारों का सिलेंडर 20-25 दिन में ही खत्म हो जाता है, वे बेहद कठिनाई में हैं. ऑनलाइन बुकिंग भी केवल उन्हीं लोगों के लिए संभव है जिन्होंने 35 दिन पहले सिलेंडर लिया हो. इस स्थिति ने रोजगार पर भी गहरा असर डाला है. ठेले वाले दुकानदारों की आय कम हो रही है और परिवार की ज़रूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है. युद्ध का यह असर दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम नागरिकों की रसोई और रोज़गार तक पहुंच जाता है.

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Published by: Akarsh aniket

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