रेलवे ट्रैक के रखरखाव के लिए डिस्ट्रेसिंग का काम शुरू

रेलवे ट्रैक के रखरखाव के लिए डिस्ट्रेसिंग का काम शुरू

मेदिनीनगर. कड़ाके की ठंड पड़ने रेलवे ट्रैक सिकुड़ जाता है. जिसके कारण रेल परिचालन में परेशानी होती है. रेलवे ट्रैक के सिकुड़न को ठीक करने के लिए डिस्ट्रेसिंग किया जाता है. रेलवे के कर्मियों ने बताया कि डिस्ट्रेसिंग के तहत पेंड्रोल क्लिप में ग्रीस लगाया जाता है. इसके साथ ही जगह-जगह पर रेलवे ट्रैक को चेक किया जाता है. यह काम क्षेत्र के अनुसार किया जाता है. प्रत्येक क्षेत्र 30 किलोमीटर का होता है. प्रतिदिन एक किलोमीटर में डिस्ट्रेसिंग का काम किया जाता है. जिसमें एक बार में 40 मजदूरों को लगाया जाता है. उसने बताया कि ठंड से सिर्फ इंसान व व्यवसाय पर असर नहीं पड़ता है. बल्कि रेलवे के परिचालन पर भी पड़ता है. जिस तरह गर्मी में रेलवे का ट्रैक फैल जाता है. उसी तरह कड़ाके की ठंड सिकुड़न हो जाता है. यह काम धूप निकलने के बाद किया जाता है. रेलवे ट्रैक का तापमान 38 डिग्री रहता है. जिन रेलवे कर्मचारियों का जो क्षेत्र दिया जाता है, वे सभी अपने क्षेत्रों में डिस्ट्रेसिंग का काम करते हैं. सामान्यतः डिस्ट्रेसिंग का काम सुबह नौ बजे के बाद शुरू किया जाता है. रेलवे ट्रैक सिकुड़ने के कारण दुर्घटना की संभावना बनी रहती है.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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