सावन की अंतिम सोमवारी पर भीम चूल्हा में उमड़ा आस्था का सैलाब, पांडवों से जुड़ी मान्यता बनी आकर्षण

पलामू के भीम बराज स्थित ऐतिहासिक भीम चूल्हा शिव मंदिर में सावन की अंतिम सोमवारी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. जानिए इस महाभारत कालीन मंदिर की महिमा.

कुंदन चौरसिया की रिपोर्ट

पलामू जिले के मोहम्मदगंज भीम बराज स्थित सावन की अंतिम सोमवार पर अहले सुबह से ही भीम चूल्हा मंदिर में जलाभिषेक व अन्य अनुष्ठान को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है.मंदिर पुजारी गंगा तिवारी और सेवक सतेंद्र चंद्रवंशी पूजा व जलाभिषेक को लेकर श्रद्धालुओं को हर संभव सहयोग में लगे रहे. महाभारत काल की जुड़ी किंदवंतियो ने भीम चूल्हा की आस्था को बढ़ाया है. पलामू-गढ़वा और बिहार के समीपवर्ती जिलों के लोगो के बीच यह स्थल लोक आस्था का केंद्र बन गया है.

भीम चूल्हा जिला मुख्यालय से करीब 70 किमी, गढ़वा से 40 किमी और बिहार की सीमा से मात्र 28 किमी की दूरी पर है. सड़क और रेल मार्ग से यहा आना आसान है. कोयल नदी के तट पर बना मंदिर परिसर में स्थापित महाभारत कालीन से जुड़ी आस्था की पहचान आज भी मौजूद है, जिसे श्रद्धालु देख कर आश्चर्यचकित होते है. चूल्हा नुमा पत्थर, पत्थर पर हाथी घोड़े और पावं के निशान को महाभारत काल की किवदंतियों से जुड़ा हुआ बताया जाता है, जो जंगलों में भटकते हुये अज्ञातवास में पांच पाण्डव यहां तक पहुचे थे.

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पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ा ‘भीम चूल्हा

कोयल नदी का किनारा और पास का घना जंगल अज्ञातवास के दौरान उनका सबसे सुरक्षित ठिकाना था. मंदिर पुजारी गंगा तिवारी ने बताया की इसी कारण उक्त किंदवंतियो से जुड़ा स्थल का नाम कलांतर में भीम चूल्हा पड़ा है. परिसर में माता कुंती के साथ बलशाली भीम के साथ पांच पाण्डवों का प्रतिमा स्थापित पर्यटन विभाग के सौजन्य से किया गया. 35 लाख की लागत से इसे विकसित भी किया गया है. भीम चूल्हा के नाम से इस स्थल से कुछ दूरी पर कोयल नदी में साढ़े चार अरब की सिंचाई बांध का निर्माण भी किया गया है, जिसका नाम भीम बराज रखा गया.जो झारखंड और बिहार के किसानों के लिये अन्नदाता के रूप में निर्मित है.

अंतिम सोमवारी पर महाप्रसाद व भजन-कीर्तिंन का आयोजन

सावन की अंतिम सोमवार को भक्तिभाव से यादगार बनाने के लिये परिसर में भजन-कीर्तन और महाप्रसाद का आयोजन किया गया. महाप्रसाद में खीर का वितरण किया गया. सावन की अंतिम सोमवारी में सुबह से ही मौसम खुशनुमा बना रहा. वर्षा और फुहारों के बीच श्रद्धालुओं ने नदी में सन्नान कर मंदिर में जलाभिषेक के बाद महाप्रसाद ग्रहण किया. भीम चूल्हा परिसर में आस्था प्रकट करने का दौर जारी है.

बारिश के बीच उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

इस मौके पर शिव भक्त कपिल देव नारायण सिंह, नन्हे सिंह, परशुराम सिंह, प्रभु राजवार,कन्हाई चंद्रवंशी,रौशन कुमार समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम सोमवार को सफल बनाने के सहयोग में शामिल हुये. बारिश के बीच जलाभिषेक करने वालो की भीड़ लगी रही. बताया जाता है की इस स्थल पर मांगी गयी मन्नत हर हाल में पूरी होती है. इस कारण स्थल आस्था के रूप में प्रसिद्ध हो गया. इस रास्ते गुजरने वाले वाहन चालक व सवार अन्य लोग मंदिर परिसर में शीश झुकाना नही भूलते.

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लेखक के बारे में

By विकाश नाथ

26 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हूं. रिपोर्टिंग के साथ डेस्क का काम करने भी अनुभव प्राप्त है. खेल डेस्क में भी काम करने का अनुभव है. रुरल के संस्करणों को देखता हूं.

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