सजा अखरा, मांदर की थाप पर झूमे लोग

मंगलवार को शहर के जीएलए कॉलेज के जेएन दीक्षित छात्रावास परिसर स्थित अखरा में सरहुल महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया.

मेदिनीनगर. मंगलवार को शहर के जीएलए कॉलेज के जेएन दीक्षित छात्रावास परिसर स्थित अखरा में सरहुल महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. पलामू प्रमंडलीय आदिवासी छात्र संघ ने महोत्सव का आयोजन किया था. आदिवासी छात्र-छात्राओं ने अखरा को आकर्षक ढंग से सजाया. मंगलवार की सुबह में विधि विधान से सखुआ की डाली और सरई के फूल को स्थापित किया गया. पाहन इंद्रदेव उरांव ने विधि विधान से सरहुल पूजा संपन्न करायी. अतिथि आदिवासी युवक-युवतियों के साथ मांदर की थाप पर थिरकते नजर आये. इसके बाद सम्मान समारोह शुरू हुआ. आयोजन समिति ने पारंपरिक तरीके से अतिथियों का स्वागत किया. मुख्य अतिथि नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डा केसी झा ने कहा कि सरहुल पर्व प्रकृति से जुड़ने व उससे गहरा प्रेम करने का संदेश देता है. सरहुल प्रकृति और झारखंड की संस्कृति का पर्व है. इस पर्व में प्रकृति की पूजा के साथ धरती को बचाने व हरियाली लाने का संदेश छिपा है. विशिष्ट अतिथि जेएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ एसके पांडेय ने कहा कि यह पर्व सिर्फ आदिवासियों का ही नहीं है, बल्कि विश्व के समस्त मानव समुदाय को प्रकृति से प्रेम करने का संदेश देता है. डॉ कैलाश उरांव ने कहा कि सरहुल पर्व सुख समृद्धि का संदेश देता है. पूर्वजों ने प्रकृति के बीच रह कर उससे प्रेम करने की सीख दी है. उनके बताये रास्ते पर हम सभी को चलने की जरूरत है. ज्ञानचंद पांडेय ने कहा कि पेड़-पौधे प्रकृति की शोभा और हम सभी का जीवन है. इसके बिना जीवन जीना मुहाल हो जायेगा. इस त्योहार पर हम सबों को अधिक से अधिक पेड़ बचाने एवं पौधा लगाने का संकल्प लेना चाहिए. प्रकृति के बिना धरती पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है. समारोह की अध्यक्षता कार्यक्रम संयोजक डॉ संजय बाड़ा ने की. संचालन अनुराधा एक्का व अमिता तिर्की ने संयुक्त रूप से किया. इसके बाद ज्योति छात्रावास की छात्राएं, केजी हाॅस्टल व जेएन दीक्षित हॉस्टल के छात्र-छात्राओं ने गीत-नृत्य प्रस्तुत किये. इस दौरान छात्राओं ने वन में का फूला फूले, गोटा जंगल चारे का दिसे रे, सखुआ रे सखुआ, पतइ सखुआ पतइ सोबे झरी गेल रे सहित कई गीत प्रस्तुत किये. मौके पर डॉ मृत्युंजय कुमार, डॉ आरके झा, डॉ जगदंबा सिंह, डॉ एसके सिंह, डॉ राजेंद्र सिंह, प्रोफेसर विकास टोपनो, प्रोफेसर बर्नाड टोप्पो, प्रताप तिर्की, सीरील टोप्पो, बलराम उरांव, उदय राम सहित कई लोग मौजूद थे. इसे सफल बनाने में संघ के अध्यक्ष अंदिप उरांव, इंदू मिंज, रोशनी कुजूर, अंकिता कच्छप, प्रतिमा मिंज, शिल्पी कुजूर, अल्पना कच्छप, अंजिता मिंज, सुजिता टोप्पो, रंजन यादव सहित कई छात्र सक्रिय थे.

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By SATYAPRAKASH PATHAK

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