रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट
पलामू: पाटन प्रखंड के खैरदोहर न्यू प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे इन दिनों जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं. विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है. छत का प्लास्टर जगह-जगह से टूटकर गिर रहा है, फर्श क्षतिग्रस्त हो चुकी है और छज्जा भी टूटकर गिरने की स्थिति में है. ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है. विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है. शौचालय की स्थिति ठीक नहीं है, जबकि विद्यालय तक पहुंचने के लिए समुचित सड़क भी नहीं है. विद्यार्थियों और शिक्षकों को पगडंडी के सहारे विद्यालय पहुंचना पड़ता है. बारिश के दिनों में आवागमन की परेशानी और बढ़ जाती है.
वर्ष 2004 में बना भवन अब जर्जर
स्थानीय लोगों के अनुसार सर्व शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2002-03 में विद्यालय की शुरुआत हुई थी. इसके बाद वर्ष 2004 में विद्यालय के लिए एक इकाई भवन का निर्माण कराया गया. करीब दो दशक बाद भवन की स्थिति पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. छत का प्लास्टर कई जगहों से उखड़कर गिर रहा है. फर्श टूट चुकी है और छज्जा भी क्षतिग्रस्त होकर गिरने की स्थिति में पहुंच गया है. जर्जर भवन में ही बच्चों की कक्षाएं संचालित होने से शिक्षक और अभिभावक भी चिंतित हैं. उनका कहना है कि भवन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है.
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95 बच्चे, पढ़ाने के लिए महज एक शिक्षक
विद्यालय में वर्तमान में कुल 95 बच्चे नामांकित हैं. इनमें प्रतिदिन करीब 70 बच्चे विद्यालय पहुंचते हैं. इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी महज एक शिक्षक के कंधे पर है. शिक्षक को शिक्षण कार्य के साथ विद्यालय के कार्यालय संबंधी कार्य भी संभालने पड़ते हैं. इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात कही जा रही है. अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की संख्या के अनुरूप शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होने से विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. एक शिक्षक के भरोसे इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई संचालित करना भी मुश्किल हो रहा है.
सड़क नहीं, पगडंडी के सहारे पहुंचते हैं बच्चे
विद्यालय तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है. विद्यार्थियों और शिक्षकों को पगडंडी के सहारे विद्यालय पहुंचना पड़ता है. बारिश के दिनों में रास्ते की स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे बच्चों और शिक्षकों की परेशानी बढ़ जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में भवन, शौचालय, सड़क और शिक्षकों जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होने के कारण बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. विद्यालय तक बेहतर सड़क नहीं होने से आवागमन भी मुश्किल बना हुआ है.
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कई बार दी गई सूचना, फिर भी नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय की जर्जर स्थिति और शिक्षकों की कमी को लेकर कई बार विभागीय स्तर पर पत्राचार और सूचना दी गई है. इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है. अभिभावकों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को स्थिति की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है.
ग्रामीणों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से जर्जर भवन की मरम्मत अथवा नया भवन बनाने, पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की पदस्थापना करने, शौचालय की व्यवस्था दुरुस्त करने और विद्यालय तक सड़क निर्माण कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जर्जर भवन में बच्चों की कक्षाएं संचालित होने से कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है.
