….जेने देखा कांवझ्रकांव, दिमाग खराब होइत हवा

….जेने देखा कांव–कांव, दिमाग खराब होइत हवाचुनावी चकल्लसहैदरनगर,पलामू.सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी पद के प्रत्याशी चुनाव प्रचार में अपनी ताकत झोंक रहे हैं. लाउडस्पीकर की शोर से लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. एक- एक व्यक्ति से आधे -आधे घंटे के अंतराल में कोई ना कोई प्रत्याशी मिल कर वोट मांग रहा […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 7, 2015 7:31 PM

….जेने देखा कांव–कांव, दिमाग खराब होइत हवाचुनावी चकल्लसहैदरनगर,पलामू.सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी पद के प्रत्याशी चुनाव प्रचार में अपनी ताकत झोंक रहे हैं. लाउडस्पीकर की शोर से लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. एक- एक व्यक्ति से आधे -आधे घंटे के अंतराल में कोई ना कोई प्रत्याशी मिल कर वोट मांग रहा है. हैदरनगर बैंक रोड स्थित चाय की दुकान पर अखबार के साथ लोग चाय की चुस्की लेते हुए चुनावी चर्चा में मशगुल दिखायी दे रहे हैं. एक ने अखबार के पन्ने को खोलते हुए कहा– अरे इहो खड़ा हउ का हो. दूसरा बोलता है– कउन फलनवा ना. हां उतो खडा हइये हउ. छोडा होखे दहूं. एक ने पुन: बात को छेड़ते हुए कहा– दिन भर जवाब देत- देत परेशान हिवा. केकरा कहुं की तोरा भोट ना देबवा. जे आवत हथी उनकरे कहत हियई के तोरा छोडके केकरा में देबई. दूसरे ने कहा –इतो अच्छा बात नहीं है. तू चुनाव भर झूठे बोलबा. पहले ने पुन: कहा- तो का करियई. तीसरे ने टपकते हुए कहा– बात तो ठीके कहईत हा. मगर सबे के मन रखला से ना ना चलतवा. तब तक चौथे ने कहा –छोड़ा इसब बात. एलेक्शन में सब चलता है. पांचवें ने झल्लाते हुए कहा– का एलेक्शन- एलेक्शन करते हो यार. प्रत्यसियन तो जीना हराम कर दिये हैं. ना चैन से बईठने दे रहे हैं, ना चैन से बतियाने दे रहे हैं. मिनट- मिनट प्रचार गाड़ी आती है और कान बहिर करवा के चला जाता है. सब ने सलाह किया. उनमें से एक संजिदा व्यक्ति बोला– अब चुनाव में खड़ा हर्थी, तो प्रचारवा तो कबे ना करतथी. हमनी के सोच- समझ के पढल- लिखल इमनदार प्रत्याशी के जितावेला चाहि बस. इतने में जिला परिषद के एक प्रत्याशी की गाड़ी आ जाती है. प्रत्याशी लोगों से मिलने लगते हैं. सभी अपना रास्ता लेकर चलते बनते हैं.