चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा सुधार को लेकर 17 प्रस्ताव पारित

मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलन संपन्न

मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलन संपन्न

प्रतिनिधि, मेदिनीनगर

पोखराहा स्थित मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलन रविवार को संपन्न हो गया. सम्मेलन का उद्घाटन प्राचार्य डॉ जे श्रीनिवास राव ने भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया. प्राचार्य डॉ राव ने कहा कि चिकित्सकों को सदैव ‘प्राणिनाम् आर्तिनाशनम्’ के महान उद्देश्य को स्मरण रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से भारत में चिकित्सा सेवा का मूल उद्देश्य पीड़ित मानवता की सेवा रहा है. सम्मेलन में प्रोफेसर डॉ राजेश मलिक ने सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) की विधि का लाइव प्रदर्शन करते हुए बताया कि आपात स्थिति में किस प्रकार त्वरित कार्रवाई कर किसी की जान बचायी जा सकती है. वहीं डॉ धनाकर ठाकुर ने इसीजी पर व्याख्यान देते हुए हृदयाघात की पहचान और त्वरित निदान की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी. सामान्य सभा की बैठक में कुल 17 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किये गये. इन प्रस्तावों का उद्देश्य देश की चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार लाना है. पारित प्रस्तावों में स्नातक व स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा के मानकों को सख्ती से लागू करने, संख्या के बजाय गुणवत्ता पर बल देने तथा मेडिकल कॉलेजों में सीट भरने के लिए कट-ऑफ अंक लगातार कम करने की प्रवृत्ति समाप्त करने की मांग शामिल है. स्वास्थ्य शिक्षा के बजट में प्रतिवर्ष चरणबद्ध वृद्धि कर कुल बजट का कम से कम 10 प्रतिशत स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च करने की अनुशंसा की गयी। प्लस टू के बाद प्रत्येक जिले में तीन वर्षीय चिकित्सा विज्ञान स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने तथा साढ़े पांच वर्ष के एमबीबीएस पाठ्यक्रम का नाम चिकित्सा विज्ञान परास्नातक करने का भी प्रस्ताव रखा गया. एमडी एवं एमएस को पीएचडी के समकक्ष तथा डीएम व एमसीएच को डीएससी (विज्ञान डॉक्टरेट) के समकक्ष मान्यता देने की अनुशंसा की गयी. चिकित्सकों की स्वायत्तता और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र व राज्यों में स्वतंत्र स्वास्थ्य सेवा संवर्ग स्थापित करने की मांग उठायी गयी. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक 60 बेड वाले अस्पतालों में विकसित करने तथा वहां कम से कम 25 चिकित्सकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने का प्रस्ताव पारित किया गया. युवा चिकित्सकों पर लागू अनिवार्य सेवा बांड समाप्त करने, मेडिकल कॉलेजों में अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने और आयुर्वेद व एलोपैथी के अवैज्ञानिक मिश्रण का विरोध करने का निर्णय लिया गया. इसके अलावा इंटरमीडिएट स्तर पर आइएससी स्वास्थ्य नामक नयी शैक्षिक धारा शुरू करने की भी अनुशंसा की गयी.

वैज्ञानिक शोधपत्रों की प्रस्तुति

सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों पर कई वैज्ञानिक शोधपत्र प्रस्तुत किये गये. विशेषज्ञ चिकित्सकों ने नवीन शोध, तकनीक और उपचार पद्धतियों पर विचार साझा किये.

नयी कार्यकारिणी का गठन

सम्मेलन में वर्ष 2026-27 के लिए सर्वसम्मति से नयी कार्यकारिणी का चुनाव किया गया. आगरा के डॉ राजकुमार गुप्ता को अध्यक्ष, रांची के डॉ शांति प्रकाश को उपाध्यक्ष तथा डालटेनगंज के डॉ अमन कुमार को सचिव चुना गया. बलिया के डॉ प्रकाश कुमार पांडेय व दिल्ली की कुमारी अंजलि को सहसचिव तथा राजस्थान के डॉ धनाकर ठाकुर को संगठन सचिव बनाया गया. सदस्यों में दिल्ली के डॉ राकेश, डॉ विकास मोहित, डॉ मनस्विनी, वेल्लोर के डॉ ध्वनि, भिलाई के डॉ विकास वर्मा और एम्स डिब्रूगढ़ के डॉ श्रीनिवास शामिल हैं. सम्मेलन में डॉ बीएन दासगुप्ता (दरभंगा), डॉ केके सिन्हा (रांची), डॉ एनपी मिश्रा (दरभंगा), डॉ सुजीत धर (कोलकाता), डॉ एसजे काले (जमशेदपुर) तथा डॉ आबाजी थत्ते (नागपुर) सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आये चिकित्सक उपस्थित थे.

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लेखक के बारे में

Author: Akarsh Aniket

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