मेदिनीनगर : सोमवार को चियांकी क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में क्षेत्रीय अनुसंधान व प्रसार सलाहकार समिति की बैठक हुई. इसका उदघाटन रांची बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ डीएन सिंह ने की. बैठक में चियांकी अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने 2017-18 में किये गये अनुसंधान कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत की.
मौके पर अनुसंधान निदेशक डॉ सिंह ने कहा कि खेती में लागत कम करने की आवश्यकता है और उपज में बढ़ोतरी करने की जरूरत है. इसके लिए किसानों को टांड जमीन में अरहर, मकई, ज्वार आदि फसलों को मेड़ पर लगाना चाहिए. क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण कभी-कभी एक ही दिन में 200 से 300 मिलीमीटर वर्षापात हो जाने से फसल बर्बाद हो जाता है.
लेकिन मेड़ पर फसल लगाने से ऐसा नही होगा. उपज भी अधिक होगा. दोन दो व तीन में 15 अक्टूबर तक तीसी, मंसूर, चना की फसल लगा लेने की सलाह दी. वैज्ञानिक डॉ अखिलेश साह ने बताया कि चना की बोआई के एक दिन बाद खरपतवार नाशक दवा एक लीटर पानी में दो से ढाई मिलिमीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से सभी खर पतवार समाप्त हो जाते है.
वैज्ञानिक प्रमोद कुमार ने निकरा परियोजना के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी. इस मौके पर डॉ नजरूल सलाम, डॉ ए अहूद, डॉ के के झा, डॉ डीके , डॉ सोहन राम, डॉ एस कर्मकार, डॉ पीके सिंह, डॉ कुमार शैलेन्द्र मोहन, अखलाक अहमद, डॉ अब्दुल माजिद, डॉ अनिल कुमार, मुनिस कुमार सिंह सहित कई लोग मौजूद थे.
