मेदिनीनगर/रांची : आत्मसमर्पण करने के बाद माओवादी कमलेश कुमार गंझू उर्फ उमेश उर्फ बिरसई उर्फ साकेत (25 लाख का इनामी) ने पुलिस को बताया कि वह 10 साल की उम्र में ही संगठन में शामिल हुआ था. तब मुझे सही-गलत के बारे में पता नहीं था. अब संगठन में पहले जैसी बात नहीं रही. नीति-सिद्धांत से संगठन के लोगों का कोई सरोकार नहीं रहा. पैसा कैसे आये, बस इसी पर ध्यान है. शोषण से मुक्ति के लिए बना संगठन अब शोषण का केंद्र बन गया है.
गरीब आदिवासियों की संगठन में कोई पूछ नहीं है. मैं आदिवासी हूं. इसलिए मुझे संगठन के स्तर से भी उपेक्षित किया जा रहा था. ऐसे में इस बार जब मैं घर लौटा, तो सरकार की आत्मसमर्पण नीति के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद चिट्ठी भेजकर संगठन को बता दिया कि अब मैं वापस नहीं लौटूंगा. मुख्यधारा में जुड़ने की बात पर पत्नी राजकुमारी देवी काफी खुश हुई. उन्होंने कहा कि मुझे नया जीवन मिला है. पति जंगल में भटकते थे. हमेशा भय बना रहता था, लेकिन अब एक नयी राह मिली है.
बूढ़ा पहाड़ पर हुई मुठभेड़ के बारे में भी बताया
जुलाई 2016 में बूढ़ा पहाड़ के पास मुठभेड़ हुई थी. उस समय अरविंद जी के साथ 50-60 की संख्या में हमलोग मौजूद थे. पुलिस जिस रास्ते से माओवादियों की तरफ बढ़ रही थी, उस रास्ते में लैंड माइंस नहीं लगा था.
क्योंकि वह रास्ता माओवादियों के आने जाने के लिए था. पुलिस पार्टी काफी नजदीक आ चुकी थी. इसके बाद संतरी ने फायरिंग कर दी. अरविंद जी ने पुलिस को रोकने के लिए विशेष टीम लगायी थी. इस घटना में पुलिस का एक जवान मारा गया था.
कोयल शंख जोन में छह सब जोन हैं
बिरसई ने संगठन की सैन्य संरचना के बारे में भी जानकारी दी है. उसके मुताबिक भाकपा माओवादी संगठन के कोयल शंख जोन में छह सब जोन है. उत्तरी लातेहार सब जोन की जो परिधि है, वह सिमरिया खलारी से रेलवे लाइन लातेहार बरवाडीह, डाल्टनगंज से पूर्व पांकी रोड, सेरनदाग, बालूमाथ, सिमरिया आदि है. गढ़वा सबजोन, दक्षिण लातेहार सबजोन, लोहरदगा सबजोन, कोयल शंख जोन के अंतर्गत है
