मेदिनीनगर : पलामू में माओवादियों का आधार पूरी तरह से कमजोर हो चुका है. आज की तिथि में यदि देखा जाये, तो पलामू में माओवादी इस स्थिति में नहीं है कि उनका एक दस्ता भी ठीक तरीके से काम कर सके. जिस तरह पुलिस ने चारों तरफ से घेराबंदी की है. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है और निरंतर नक्सलियों के खिलाफ जो अभियान चल रहा है, उसे देखते हुए माओवादी निकट भविष्य में भी यहां दस्ता को सक्रिय करने की स्थिति में नहीं है.
इसका खुलासा पकड़े गये इनामी सब जोनल कमांडर सुरेंद्र यादव द्वारा पुलिस के समक्ष दिये गये बयान से हुआ है. पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत माहथा ने जोनल कमांडर के इस स्वीकारोक्ति बयान की पुष्टि की है. कहा है कि माओवादी संगठन के बारे में सुरेंद्र ने जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक संगठन अब पलामू में पूरी तरह से खात्मे के कगार पर पहुंच गया है. अभी माओवादी का एक भी दस्ता पलामू के किसी भी इलाके में सक्रिय नहीं है.
संगठन से जो पुराने लोग जुड़े थे, उसमें से कई गिरफ्तार हो गये. कई मुठभेड़ में मारे गये. कई ने आत्मसमर्पण किया और कई लोग इलाका छोड़ चुके हैं. स्थिति को देख कर नये लोग अब अपना भविष्य दांव पर लगाकर संगठन से नहीं जुड़ रहे हैं. ऐसा इसलिए भी हुआ जो इलाके पहले माओवादियों के लिए सेफ जोन माना जाता था.
उन इलाकों में पुलिस की दखल बढ़ी है. कांफ्रेंस में एसपी श्री माहथा ने कहा कि निश्चित तौर पर गांवों में सुरक्षा का जो माहौल तैयार हुआ है, वह आम आदमी के जीवन के लिए बेहतर है. लेकिन अब कि जो परिस्थिति है, उसमें पुलिस प्रशासन की चुनौती बढ़ गयी है. वैसे इलाके जो दूसरे राज्यों के सीमा से सटे है. पूर्व में वैसे इलाके नक्सलियों के लिए सेफ जोन था. लेकिन अब वैसे इलाके में जब पिकेट बना है पुलिस की सक्रियता बढ़ी है, तो इसके साथ-साथ यह भी देखना होगा कि कैसे यह वातावरण आगे भी कायम रहे.
यह स्थिति पुलिस को उत्साहित करने वाला है. लेकिन साथ ही भविष्य की जो चुनौतियां है, वह भी कम नहीं है. 10 से 15 वर्षों तक का समय चुनौतीपूर्ण है. इस दौरान विकास व सुरक्षा का वातावरण बनाये रखना होगा, तभी आम आदमी यह महसूस कर पायेगा कि उग्रवाद खात्मे का लाभ उसे मिला है. ऐसे में संवेदनशील पुलिसिंग की आवश्यकता है.
माओवादियों ने बदली है रणनीति
बढ़ते पुलिस दबिश के कारण माओवादियों ने भी अपने रणनीति में बदलाव किया है. एसपी इंद्रजीत माहथा की माने तो पहले माओवादी जब कहीं जाते थे, तो अपना हथियार साथ रखते थे और दस्ता के एक-दो सदस्य भी चलते थे. लेकिन जब माओवादियों को यह लगने लगा कि पुलिस की सक्रियता बढ़ गयी है. उसके बाद से रणनीति को बदलते हुए बिल्कुल आम आदमी की तरह अपने गांव, घर या फिर रिश्तेदार के घर जाने लगे हैं. सुरेंद्र यादव भी आम आदमी की तरह ही घर लौट रहा था. फिलहाल वह मध्य जोन के अंतर्गत आने वाला उत्तरी सबजोन का सबजोनल कमांडर था.सुरेंद्र का कार्य क्षेत्र एनएच-98 से लेकर बिहार के डुमरिया, चोरहा पहाड़, धोबिनी पहाड़, कोठिला का इलाका था.
अॉपरेशन एक्सपर्ट है सुरेंद्र
पकड़ा गया पांच लाख का इनामी सब जोनल कमांडर सुरेंद्र यादव का फोकस कभी भी लेवी पर नहीं रहा है. शुरुआती दौर से ही वह फौजी दस्ता में सक्रिय था. एसपी इंद्रजीत माहथा ने बताया कि संगठन के लिए सुरेंद्र अॉपरेशन एक्सपर्ट था. बड़े – बड़े विध्वंसक कार्रवाई में सुरेंद्र यादव की भूमिका रही है. उसने संगठन के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी दी है, जिसके आधार पर पुलिस इस मामले में आगे की कार्रवाई की जायेगी.
अभियान में थे जो शामिल
पलामू एसपी इंद्रजीत माहथा की सूचना पर पुलिस ने कार्रवाई की. माओवादी के गिरफ्तारी के लिए जो टीम बनी थी, उसमें अभियान एसपी अरुण कुमार सिंह, प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक विमलेश कुमार त्रिपाठी, चंद्रशेखर आजाद, सीआरपीएफ 134 बटालियन के सुनील कुमार, नौडीहा थाना प्रभारी दयानंद साह, छतरपुर थाना प्रभारी वासुदेव मुंडा के अलावा सीआरपीएफ, आइआरबी व जिला बल के जवान शामिल थे.
सुरेंद्र ने तीन शादी की है
माओवादी सुरेंद्र यादव ने तीन शादी की थी. पहली पत्नी की मौत के बाद जब संगठन में कद, कार्य क्षेत्र और ओहदा बढ़ा तो उसने दो और शादी कर ली. उसका कार्य क्षेत्र बिहार के डुमरिया तक था और झारखंड में छतरपुर. उसने एक शादी छतरपुर में की थी और दूसरी बिहार के डुमरिया में. झारखंड में जब आता था, तब ससुराल में शरण लेता था और बिहार में भी उसे सुरक्षित स्थान मिल गया था. एसपी इंद्रजीत माहथा ने बताया कि सुरेंद्र यादव के संपति का ब्योरा भी जुटाया जायेगा. उसके बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी.सुरेंद्र ने सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की है. अभी उसकी उम्र लगभग 32 साल है.
