बच्चों व महिलाओं की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी

''सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य'' पर विधिक जागरुकता शिविर आयोजित, बोले न्यायमूर्ति

पाकुड़. झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय प्रसाद ने कहा कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल प्रशासन या न्यायपालिका का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि जागरुकता ही बच्चों की सुरक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम है. समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसके प्रति संवेदनशील तथा सजग होना चाहिए. वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की ओर से आयोजित “सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य ” विषय पर विधिक जागरुकता व विधिक सशक्तिकरण शिविर को संबोधित कर रहे थे. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पाकुड़ द्वारा झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय प्रसाद, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डीएलएसए अध्यक्ष दिवाकर पांडे, उपायुक्त मेघा भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह, फैमिली जज रजनीकांत पाठक, वन प्रमंडल पदाधिकारी सौरभ चंद्रा और अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया. इसमें बच्चों की सुरक्षा, बाल संरक्षण, पॉक्सो अधिनियम, बाल विवाह निषेध, बच्चों के अधिकार और निःशुल्क विधिक सहायता जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गयी. समाज में बच्चों के प्रति संवेदनशील वातावरण तैयार करने पर बल दिया गया. जागरुकता कार्यक्रमों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण न्यायमूर्ति संजय प्रसाद ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बाल विवाह रोकथाम, निराश्रित बच्चों के आधार कार्ड बनवाने और जरूरतमंदों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे जागरुकता कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाते हैं. उन्होंने बच्चों द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत और नुक्कड़ नाटक की सराहना करते हुए कहा कि बाल तस्करी, बाल शोषण और बाल विवाह जैसे गंभीर मुद्दों को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाया गया. उन्होंने कहा कि समाज को जागरूक करने के लिए सांस्कृतिक माध्यम भी बेहद प्रभावशाली साबित होते हैं. न्यायपालिका और प्रशासन के समन्वय की हुई सराहना प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे ने कहा कि न्यायमूर्ति संजय प्रसाद को पाकुड़ लाने का प्रयास कई बार किया गया था और इस बार उनके आगमन से पूरा जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है. उन्होंने उपायुक्त मेघा भारद्वाज की कार्यशैली और प्रशासन तथा न्यायपालिका के बीच बेहतर समन्वय की सराहना की. कहा कि बार और बेंच एक ही रथ के दो पहिए हैं. पाकुड़ में न्यायिक अधिकारियों तथा अधिवक्ताओं के बीच बेहतर संबंध देखने को मिलते हैं. उपायुक्त ने बच्चों के विकास को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि बच्चों का सुरक्षित, स्वस्थ और सर्वांगीण विकास जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने बताया कि जिले में 1285 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से लगभग 91 हजार बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है. उन्होंने कहा कि जिले में विशेष जरूरत वाले बच्चों, अनाथ बच्चों और जरूरतमंद बच्चों के लिए कई योजनाएं संचालित हैं. वर्तमान में 236 बच्चों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया है और 128 बच्चे नियमित रूप से लाभान्वित हो रहे हैं. पॉक्सो एक्ट और बाल संरक्षण पर दी गयी जानकारी कार्यक्रम में अवर निरीक्षक विकण कुमार ने पॉक्सो एक्ट के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि यह बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने वाला जेंडर न्यूट्रल कानून है. उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के सभी व्यक्ति इस कानून के तहत बच्चे माने जाते हैं और अपराधियों के लिए कठोर सजा का प्रावधान है. कार्यक्रम के दौरान नव नियुक्त चौकीदारों की टीम ने बाल विवाह, मानव तस्करी, पॉक्सो एक्ट और बाल संरक्षण पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया. इसके माध्यम से गंभीर सामाजिक मुद्दों पर जागरुकता का संदेश दिया गया. परिसंपत्तियों का किया गया वितरण शिविर में विभिन्न विभागों की योजनाओं के तहत लाभुकों के बीच स्वीकृति-पत्र और परिसंपत्तियों का वितरण किया गया. जेएसएलपीएस के माध्यम से 75 स्वयं सहायता समूहों को एक करोड़ 48 लाख 50 हजार रुपये की क्रेडिट लिंकेज राशि प्रदान की गयी. न्यायालय से मोटर दुर्घटना दावा वाद के सात मामलों में कुल 98 लाख 18 हजार रुपये की मुआवजा राशि भी लाभुकों के बीच वितरित की गयी. कार्यक्रम का संचालन डीएलएसए सचिव रूपा वंदना कीरो ने किया, जबकि समापन पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. मौके पर विभिन्न विभागों के अधिकारी, न्यायिक पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

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Author: RAKESH KUMAR

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