एक ही वाहन पर दो रिपोर्ट देकर फंसे आईओ, जज ने अनुसंधानकर्ता को थमाया नोटिस

पाकुड़ में जब्त वाहन पर पुलिस अनुसंधानकर्ता ने पेश कीं दो अलग-अलग रिपोर्टें. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ASI के खिलाफ जांच...

कोर्ट प्रतिनिधि, पाकुड़। जब्त वाहन को मुक्त कराने से जुड़े मामले में पुलिस अनुसंधानकर्ता द्वारा अदालत में अलग-अलग रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने का मामला सामने आया है. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे की अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अनुसंधानकर्ता सहायक अवर निरीक्षक मृत्युंजय कुमार के खिलाफ जांच का आदेश दिया है. अदालत ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है. साथ ही आदेश की प्रति पाकुड़ के पुलिस अधीक्षक को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके.

मामला लिट्टीपाड़ा थाना कांड संख्या 59/2025 से संबंधित है. रविकांत रवि ने जब्त वाहन संख्या जेएच 18एल-5627 को मुक्त कराने के लिए न्यायालय में याचिका दायर की थी. न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत ने सात अप्रैल 2026 को याचिका खारिज कर दी थी. आदेश में वाहन के राजसात की कार्रवाई शुरू होने का उल्लेख किया गया था.

दो रिपोर्टों में सामने आया विरोधाभास

इसके खिलाफ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में क्रिमिनल रिवीजन संख्या 34/2026 दाखिल की गयी. सुनवाई के दौरान पुलिस अनुसंधानकर्ता की ओर से दाखिल दो रिपोर्टों में विरोधाभास सामने आया.

अदालत के आदेश के अनुसार, एक फरवरी 2026 की रिपोर्ट में अनुसंधानकर्ता ने बताया था कि वाहन के राजसात की कार्रवाई उपायुक्त, पाकुड़ द्वारा शुरू कर दी गयी है. वहीं तीन जुलाई 2026 को दाखिल दूसरी रिपोर्ट में कहा गया कि वाहन के संबंध में राजसात की कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई है.

अदालत ने मामले में यह भी पाया कि जिन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज है, उनमें वाहन के राजसात का प्रावधान नहीं है. न्यायालय ने अनुसंधानकर्ता की दोनों रिपोर्टों को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच के निर्देश दिए.

निचली अदालत का आदेश रद्द

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सात अप्रैल 2026 को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया और पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली.

साथ ही अनुसंधानकर्ता द्वारा अदालत में कथित रूप से गलत रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 379 के तहत जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया है.

अदालत ने अनुसंधानकर्ता मृत्युंजय कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए अपने कार्यालय को आदेश की प्रति और उनकी ओर से दाखिल दोनों रिपोर्टों की प्रतियां पाकुड़ एसपी को भेजने का निर्देश दिया है.


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लेखक के बारे में

By सानू दत्ता

सानू दत्ता: पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। वर्तमान में प्रभात खबर, पाकुड़ में कार्यरत हूं। ग्रामीण विकास, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग में विशेष रुचि और अनुभव रखता हूं। डिजिटल पत्रकारिता और मल्टीमीडिया कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं।

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