प्रतिनिधि, फरक्का केंद्रीय जल आयोग के तत्वावधान में फरक्का बराज में भारत-बांग्लादेश के बीच जल बंटवारे को लेकर गुरुवार को दोनों देशों के प्रतिनिधियों की बैठक संपन्न हुई. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने फीडर कैनाल तथा गंगा नदी के ऊपरी और निचले हिस्सों का निरीक्षण किया, और वर्तमान जल प्रवाह की स्थिति का जायजा लिया. गौरतलब हो कि भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में 30 वर्षों के लिये गंगा जल बंटवारा संधि हुई थी, जिसकी अवधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने जा रही है. इस संधि के तहत फरक्का बराज पर जनवरी से मई तक गंगा जल का बंटवारा किया जाता है. समझौते के अनुसार यदि गंगा में जल प्रवाह 70 हजार क्यूसेक या उससे कम रहता है तो दोनों देशों को 50-50 प्रतिशत पानी दिया जाता है. वहीं, जल प्रवाह 70 से 75 हजार क्यूसेक के बीच होने पर बांग्लादेश को 35 हजार क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जाता है. इसके अलावी 11 मार्च से अगले 10 दिनों तक दोनों देशों को 35-35 हजार क्यूसेक पानी देने का प्रावधान भी लागू रहता है. बैठक में मौजूदा परिस्थितियों, जल स्तर और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गयी. वर्ष 2026 के बाद यह जल बंटवारा समझौता जारी रहेगा या इसमें बदलाव होगा, इसे लेकर अगले महीने कोलकाता में दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता प्रस्तावित है. दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने बैठक को सकारात्मक बताते हुये कहा कि गंगा जल बंटवारे से जुड़े सभी पहलुओं की गंभीरता से समीक्षा की जा रही है.
फरक्का : भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर हुई समक्षी
केंद्रीय जल आयोग के तत्वावधान में फरक्का बराज में भारत-बांग्लादेश के बीच जल बंटवारे को लेकर गुरुवार को दोनों देशों के प्रतिनिधियों की बैठक संपन्न हुई.
