ईश्वर सर्वत्र हैं, दुख-सुख में उनका स्मरण करें : स्वामी
हिरणपुर. स्थानीय देवपुर के बजरंगबली मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया.
हिरणपुर. स्थानीय देवपुर के बजरंगबली मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन वृंदावन से पधारे स्वामी अभयानन्द अभिषेक शास्त्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं. जीवन में दुख तब आता है जब मनुष्य ईश्वर से विमुख हो जाता है. उन्होंने कहा कि सुख और दुख दोनों भगवान के ही दो स्वरूप हैं, इसलिए दोनों ही स्थितियों में ईश्वर का स्मरण करना चाहिए. स्वामी जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा वंदनीय है और यह तीनों प्रकार के पापों का नाश करने में सक्षम है. स्वामी अभयानन्द ने जीवन के अस्थायित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य जीवन भर संग्रह करता है, परंतु मृत्यु के समय सब कुछ यहीं छोड़कर चला जाता है, जबकि पशु बिना संग्रह के भी सुखी रहते हैं. इसलिए मनुष्य को धर्म रूपी धन संग्रह करना चाहिए, जिससे उसका अंत सुखमय हो सके. उन्होंने कहा कि यह सारा जगत ईश्वर से व्याप्त है और प्रभु सर्वत्र हैं. मोक्ष प्राप्त करने के लिए ऋषि-मुनि भी सत्कर्म करते हैं. उन्होंने कहा कि निष्काम भाव से सत्कर्म करने वाला मनुष्य ही ईश्वर का साक्षात दर्शन प्राप्त कर सकता है.
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