पाकुड़: सीपीआइएम कार्यकर्ताओं ने सोमवार को केंद्र सरकार की निजीकरण नीतियों, श्रम संहिताओं और राज्य में जेपीएससी-जेएसएससी पेपर लीक के मामलों के विरोध में जेल भरो आंदोलन के तहत गांधी चौक पर प्रदर्शन किया. आंदोलन में किसान सभा के कार्यकर्ता भी शामिल हुए. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.
चार श्रम संहिताएं रद्द करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने, छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करने, फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने और निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की. कार्यक्रम का नेतृत्व नादेर हुसैन ने किया.
नादेर हुसैन ने कहा कि केंद्र सरकार देश के महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रमों और रणनीतिक संस्थानों का निजीकरण कर उन्हें बड़े विदेशी कॉरपोरेट घरानों के हवाले कर रही है. उन्होंने रेलवे, कोयला खदान, इस्पात, उद्योग, सड़क, हवाई परिवहन, हवाई अड्डे और बैंक समेत सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण का विरोध किया.
निजीकरण से बेरोजगारी बढ़ने का आरोप
उन्होंने कहा कि निजीकरण के कारण बेरोजगारी बढ़ रही है और पढ़े-लिखे युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं. देश की सार्वजनिक संपत्तियां जनता की पूंजी हैं. इन्हें निजी कॉरपोरेट कंपनियों को सौंपने की कोशिश का सीपीआइएम पुरजोर विरोध करेगी, चाहे इसके लिए कार्यकर्ताओं को जेल ही क्यों न जाना पड़े.
जेपीएससी-जेएसएससी पेपर लीक को लेकर सरकार पर निशाना
नादेर हुसैन ने जेपीएससी-जेएसएससी पेपर लीक मामले को लेकर राज्य सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और नौकरियां बेची जा रही हैं. महत्वपूर्ण परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होना आम बात हो गयी है.
मौके पर गुपीन सोरेन, रामप्रवेश पासवान, देवाशीष दत्त गुप्ता, रिजाउल करीम समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे.
