पाकुड़. भक्ति, परंपरा और आस्था के बीच बागतीपाड़ा स्थित प्राचीन मनसा मंदिर में सर्पों की देवी मां मनसा की पूजा-अर्चना धूमधाम से संपन्न हुई. सात दिवसीय मनसा गान के समापन के बाद संधि पूजा के साथ विधि-विधान एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान किया गया. मुख्य पुजारी रामू राय एवं छोटे पुजारी रतन राय ने कलश स्थापना कर मां मनसा की पूजा-अर्चना करायी. मनसा पूजा को लेकर सुबह से ही बागतीपाड़ा एवं मालगोदाम रोड का इलाका भक्तिमय रहा. शहर के विभिन्न मोहल्लों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे.
विषहरी देवी के रूप में पूजी जाती हैं मां मनसा
स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार मां मनसा को विषहरी देवी के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि मां की आराधना से परिवार विषैले जीव-जंतुओं के भय से सुरक्षित रहता है. पूजा में वर्षों पुरानी परंपराओं का पालन किया गया. परंपरा के अनुसार परिवार का एक सदस्य निर्जला उपवास रखकर पूजा-अर्चना करता है और अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद ही जल ग्रहण करता है.
अग्निपथ पर नृत्य के साथ मंदिर में प्रवेश
पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने पूजा कलश सिर पर धारण कर मोहल्ले का भ्रमण किया. इसके बाद मनसा माता कुंड में स्नान कर मंदिर परिसर पहुंचे. पारंपरिक अनुष्ठान के तहत अग्निपथ पर नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं ने मंदिर में प्रवेश किया और मां मनसा की पूजा-अर्चना की.
मनसा पूजा के अवसर पर बागतीपाड़ा एवं मालगोदाम रोड में मेले का भी आयोजन किया गया. मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें, खिलौने एवं मनोरंजन के साधन लगाए गये. बच्चों और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला.
आयोजन को सफल बनाने में प्रेमचंद साहा, असीत दास, सर्वेश्वर झा, हिसाबी राय, छोटन मेहरा, अमित घोष, बच्चु राय, गोविंद गुप्ता, रणवीर सिंह, राहुल राय, जीत राय, शुकू मंडल, बामा बागती, विधान राय एवं विष्णु राय सहित अन्य लोगों ने सहयोग किया. सभी ने मिलकर इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव को भव्य एवं यादगार बनाने में अपनी भूमिका निभायी.
