आंदोलन और भूख हड़ताल भी बेअसर, छह साल से बंद पड़ा अमड़ापाड़ा का सीएचसी

अमड़ापाड़ा बाजार का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छह साल से बंद है. भूख हड़ताल और आंदोलन के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है, लोग परेशान.

प्रतिनिधि, अमड़ापाड़ा: अमड़ापाड़ा मुख्य बाजार क्षेत्र में वर्षों से बंद पड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भवन आज भी स्वास्थ्य सुविधा बहाल होने की बाट जोह रहा है. करीब छह साल से अधिक समय से बंद पड़े इस अस्पताल को दोबारा शुरू कराने के लिए कई स्तर पर प्रयास किए गए, लेकिन तमाम आश्वासनों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है. बाजार क्षेत्र की करीब छह हजार की आबादी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. प्राथमिक उपचार के लिए भी लोगों को करीब तीन किलोमीटर दूर सीएचसी फतेहपुर जाना पड़ता है.

आंदोलन से भूख हड़ताल तक, फिर भी नहीं खुला अस्पताल

बंद अस्पताल को पुनः शुरू कराने के लिए 80 वर्षीय समाजसेवी नरेशकान्त साह ने आंदोलन चलाया और भूख हड़ताल तक की. इसके अलावा जिले के वरीय अधिकारियों को कई बार पत्राचार किया गया तथा ज्ञापन सौंपकर अस्पताल को फिर से चालू कराने की मांग उठायी गयी. अधिकारियों की ओर से कई बार आश्वासन भी मिला, लेकिन वर्षों बाद भी अस्पताल भवन उसी स्थिति में पड़ा है.

छह हजार की आबादी को इलाज के लिए जाना पड़ता है दूर

अमड़ापाड़ा मुख्य बाजार क्षेत्र में करीब छह हजार की आबादी रहती है. बाजार में प्रतिदिन बड़ी संख्या में दुकानदार, व्यवसायी, मजदूर और आसपास के लोग पहुंचते हैं. ऐसे में बुखार, चोट, उल्टी-दस्त या अन्य आकस्मिक स्थिति में प्राथमिक उपचार के लिए भी लोगों को तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. रात और बारिश के दौरान परेशानी और बढ़ जाती है.

लाखों का सोलर सिस्टम भी हो रहा बर्बाद

अस्पताल भवन में लाखों रुपये की लागत से लगाया गया सोलर सिस्टम भी देखरेख के अभाव में खराब हो रहा है. भवन बंद रहने के कारण सोलर प्लेट समेत अन्य उपकरणों के संरक्षण पर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के साथ-साथ यहां उपलब्ध संसाधनों को भी जल्द सुरक्षित किया जाना चाहिए.

सीएसआर के बावजूद अस्पताल शुरू कराने की पहल नहीं

क्षेत्र में संचालित कोल कंपनियों की ओर से सीएसआर के तहत विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाती हैं. इसके बावजूद बाजार क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण इस अस्पताल को पुनः शुरू कराने की दिशा में कोई ठोस पहल सामने नहीं आयी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और कोल कंपनियां मिलकर भवन की मरम्मत, उपकरण और अन्य आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था कर इसे दोबारा उपयोग में ला सकती हैं.

आश्वासन के बाद भी स्थिति जस की तस

आंदोलन, भूख हड़ताल, पत्राचार और ज्ञापन के बावजूद अस्पताल शुरू नहीं होने से लोगों में निराशा है. स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन भवन का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत के बाद जल्द स्वास्थ्य सेवा शुरू करे तथा सोलर सिस्टम समेत अन्य संसाधनों को बर्बाद होने से बचाया जाए.

क्या कहते हैं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी

सीएचसी फतेहपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ खालिद अहमद ने बताया कि आगामी कुछ दिनों में जिले के डीडीसी का अमड़ापाड़ा दौरा होना है. वे बाजार के बंद पड़े सीएचसी का भी अवलोकन करेंगे. सीएचसी को पुनः शुरू करने की दिशा में पहल की जाएगी.

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लेखक के बारे में

By रमेश भगत

रमेश भगत प्रभात खबर, पाकुड़ में ब्यूरो चीफ हैं. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है. 15 वर्षों के पत्रकारिता करियर की शुरुआत दिल्ली में CNEB News Channel से की. इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के ईएमएमसी (EMMC) और डीडी न्यूज में कार्य किया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में उन्हें व्यापक अनुभव है. राजनीति, प्रशासन, अपराध, विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और जनसरोकार सहित हर विधा की खबरों की रिपोर्टिंग और विश्लेषण में उनकी विशेष रुचि है.

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