आक्रोश . महेशपुर के सोनारपाड़ा की महिलाओं ने शराबबंदी की मांग पर खोला मोरचा
दो दिन पहले महिलाओं ने गांव से ही लगभग 30 लीटर देसी शराब को जब्त कर पुलिस के सुपुर्द किया था. सोमवार को महिलाओं ने अपनी मांग को लेकर समाहरणालय पहुंच कर जोरदार प्रदर्शन किया
पाकुड़ : जिला के महेशपुर प्रखंड के सोनारपाड़ा के महिलाओं ने सोमवार को नया समाहरणालय स्थित उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर गांव में शराब बंदी की मांग की. गांव के आशा सरकार, अनिता दास, ताशलिमा बीबी, मेनोका दास, शुकुदानी बेबा, रूली बीबी, साबिना बीबी, नुरिमा बीबी, प्रितिका मंडल, सांतना बाला दासी, पूजा मंडल, पूर्णिमा मंडल सहित अन्य ने बताया कि सोनारपाड़ा गांव एक बहुत ही छोटा सा गांव है. उपरोक्त गांव में कई जहगों पर सरकारी व गैर सरकारी शराब दुकान है. महिलाओं ने कहा कि गांव में शराब दुकान रहने से युवाओं का भविष्य बरबाद हो रहा है. गांव में अधिततर मजदूर व गरीब तबके के लोग रहते हैं.
उन्होंने कहा कि कई लोग अपने दिनभर की कमाई को शराब में ही लूटा देते हैं. जिस कारण उपरोक्त घरों के लोगों को परिवार का भरण पोषण करने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है. महिलाओं ने कहा कि जब तक गांव में शराब दुकान पुरी तरह बंद नहीं होती है तब तक गांव की महिला हार नहीं मानेगी. इसे रोकने को लेकर आंदोलन के लिए के लिए सड़क पर उतरने को तैयार है. समाहरणालय पहुंची महिलाओं ने गांव में शराब बंदी को लेकर जमकर नारेबाजी भी की. मौके पर हिरणपुर के जिप सदस्य शहनाज बेगम व पूर्व प्रमुख अब्दु गनी ने भी शराबबंदी का समर्थन किया.
उपायुक्त से शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग
समाहरणालय के समक्ष प्रदर्शन करती सोनारपाड़ा की महिलाएं.
गांव में महिलाओं का शराब बंदी को लेकर छेड़ा गया अभियान सराहनीय है. गांव में शराब दुकान को बंद करने की दिशा में जिला प्रशासन को जल्द ही ठोस पहल करनी चाहिए. गांव मे शराब दुकान बंद होने से गांव का वातावरण भी अच्छा होगा. उन्होंने कहा कि गांव में शराब बंदी को लेकर मेरे द्वारा महिलाओं को हर संभव मदद किया जायेगा.
मुकेश शुक्ला, जिप उपाध्यक्ष
इस पर जिला प्रशासन त्वरित कार्रवाई करेगा. अवैध शराब दुकानों को बंद कराने को लेकर संबंधित पदाधिकारी को निर्देश दिया जायेगा. सरकारी शराब दुकान के संबंध में उत्पाद विभाग से रिपोर्ट मांगी जायेगी. जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी.
ए मुथु कुमार, डीसी
इस पर जिला प्रशासन त्वरित कार्रवाई करेगा. अवैध शराब दुकानों को बंद कराने को लेकर संबंधित पदाधिकारी को निर्देश दिया जायेगा. सरकारी शराब दुकान के संबंध में उत्पाद विभाग से रिपोर्ट मांगी जायेगी. जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी.
ए मुथु कुमार, डीसी
क्या कहती हैं गांव की महिलाएं
गांव में शराब दुकान को बंद नहीं किया गया तो प्रशासन के विरुद्ध आंदोलन के लिए महिला एकजुट होकर सड़क पर उतरने को विवश होंगी.
आशा सरकार, ग्रामीण
गांव में अधिकतर गरीब व मजदूर तबके के लोग अपना जीवन-यापन करते है. शराब के कारण आये दिन कई घरों में झपड़ होती रहती है. उन्होंने कहा कि गांव में प्रशासन द्वारा जल्द ही देशी व विदेशी शराब दुकानों को बंद करना चाहिए.
अमिता दासी, ग्रामीण
शराब दुकान रहने से गांव के युवा पीढ़ी को भी बुरा प्रभाव पड़ता है. दुकानों को प्रशासन द्वारा जल्द बंद नहीं किया गया तो अांदोलन तेज किया जायेगा.
तसलिमा बीबी, ग्रामीण
