मांग. बरबाद हुई प्याज की फसल, पीड़ित किसानों ने की मुआवजे की मांग
पाकुड़ : सदर प्रखंड के मनिरामपुर पंचायत के सैकड़ों ग्रामीणों ने मंगलवार को पूर्व जिला परिषद सदस्य हाजीकुल आलम के नेतृत्व में समाहरणालय में प्रदर्शन किया. पिछले दिनों हुए अचानक मूसलाधार बारिश के कारण लगभग 500 एकड़ जमीन पर लगी प्याज की फसल नष्ट हो गयी थी. पूर्व जिप सदस्य हाजीकुल आलम ने कहा कि तीन अप्रैल को अचानक काफी मूसलाधार बारिश हुई थी. जिसके बाद मनिरामपुर पंचायत के किसानों ने लगभग 500 एकड़ में लगायी गयी प्याज की फसल पूरी तरह नष्ट हो गयी थी. जिसका मुआवजा की मांग प्रशासन से की गयी थी. उन्होंने बताया कि किसानों द्वारा बैंक के
माध्यम से कर्ज लेकर फसल लगाने का काम किया था. परंतु फसल नष्ट हो जाने के कारण किसानों को काफी नुकसान हुआ है. प्रदर्शन के माध्यम से किसानों ने मांग किया है कि नष्ट हुए प्याज की खेती का मुआवजा प्रशासन दिलाये. साथ ही खेती के एवज में बैंक से लिए गये ऋण को भी माफ कराने काम करें. इसके बाद पूर्व जिप सदस्य श्री आलम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के नाम से अपर समाहर्ता सुधीर बाड़ा को एक मांग पत्र सौंपा. जिसके बाद अपर समाहर्ता सुधीर बाड़ा ने जल्द ही सर्वे कर मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया. मौके पर झामुमो अल्पसंख्यक मोरचा के पूर्व जिला अध्यक्ष शाहीन परवेज, झामुमो के पूर्व जिला प्रवक्ता शाहिद इकबाल, मुखिया मोसम्मत अख्तारा बानू पंचायत समिति सदस्य शमीमा बीबी, जैसमीन बीबी सहित अन्य मौजूद थे.
प्रशासन की सुस्त रवैये के कारण अब तक किसानों को नहीं मिल पाया न्याय
मनिरामपुर पंचायत की मुखिया मोसम्मत अख्तारा बानू ने चार अप्रैल को ही उपायुक्त को पत्र लिख कर उपरोक्त पंचायत में लगभग 500 एकड़ जमीन पर लगे प्याज की फसल नष्ट हो जाने की लिखित सूचना देते हुए किसानों को मुआवजा दिलाये जाने व बैंक का ऋण माफ कराये जाने की मांग की थी. एक ओर सूबे के कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने जिले के उपायुक्त को फसल नष्ट होने पर किसानों को त्वरित मुआवजा दिलाये जाने का निर्देश दिया है. वहीं पाकुड़ के मनिरामपुर पंचायत में मूसलाधार बारिश से लगभग 500 एकड़ पर लगे किसानों के प्याज नष्ट हो जाने के लगभग छह माह के बाद भी प्रशासन द्वारा किसी प्रकार का सर्वे तक नहीं कराया गया है. अब सवाल यह उठता है कि सूबे के मंत्री के निर्देश का पालन क्या प्रशासन नहीं करती है. या फिर किसानों के लिए मुआवजा का कोई प्रावधान ही नहीं है. बहरहाल इतने लंबे समय बित जाने के बाद किसानों की उम्मीद टूट चुकी है. यही कारण है कि काफी संख्या में किसान आज समाहरणालय पहुंच कर अपने मांगों को लेकर प्रदर्शन किया.
