गरमी की मार. पेयजल संकट गहराया, बांसलोइ नदी बनी सहारा
महेशपुर प्रखंड के कई गांव में पेयजल संकट गहरा गया है. बांसलाइ नदी सूखने के कगार पर है. गरमी में प्यास बुझाने के लिए लोग नदी का बालू हटा कर पानी निकाल रहे हैं. जलस्तर तेजी से नीचे जाने के कारण लोगों को पेयजल की मार झेलनी पड़ रही है
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महेशपुर : भीषण गरमी के कारण महेशपुर प्रखंड क्षेत्र में पेयजल की किल्लत की समस्या गहराने लगी है. दिन-ब-दिन तेजी से जलस्तर के नीचे जाने के कारण तालाब, कुआं सूख चुके हैं.
लाइफ लाइन बांसलोइ नदी भी सूखने की कगार पर है. फिलहाल लोग बांसलाइ लोग से बालू हटाकर प्यास बुझाते हैं. प्रखंड मुख्यालय के दुबराजपुर गांव के समीप कई महिलाएं बांसलोइ नदी से बालू हटा कर पीने का पानी निकालते देखा गया है. महिलाएं प्रियंका लेट, सरबानी दास, बिमली लेट, हीरा लेट,
पूरबी दासी सहित अन्य महिलाओं ने बताया की गांव में करीब 20 से 25 घरों में 150 की आबादी के लिए एकमात्र चापानल है. पानी में आयरन की अधिकता रहने की वजह से पीने के लिए उपयोग नहीं करते हैं. नदी से बालू हटा कर पीने का पानी निकालना पड़ता है. दिन-ब-दिन तेजी से घटते जलस्तर के कारण पेयजल की समस्या उत्पन्न हो रही है. परंतु चापानलों में गाड़े या लगायी जानेवाली पाइप जलस्तर के अनुपात में कम पड़ रहे हैं.
अप्रैल में यह हाल तो मई जून में क्या होगा?
अप्रैल माह में पानी की किल्लत की स्थिति यह है तो मई व जून में क्या होगा इसकी चिंता लोगों को सता रही है. सात अप्रैल को महेशपुर में खुले में शौच मुक्त विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में उपायुक्त दिनेश चंद्र मिश्र ने गरमी की अधिकता को देखते हुए प्रत्येक गांव में एक तालाब, डोभा, कुंआ के निर्माण हेतु 15 अप्रैल तक चयन कर कार्य शुरू करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों तथा पंचायत तथा पंचायत सचिवों को दिया है.
साथ ही पेयजल की समस्या हेतु प्रत्येक पंचायत में डीप बोरिंग, पानी टंकी के निर्माण करने की बात उपस्थित मुखिया से कही थी. गरमी के तीन महीनों में पयेजल की व्यवस्था के लिए पैसा खर्च करने का स्पष्ट निर्देश उपायुक्त ने दिया है. साथ ही पेयजल व स्वच्छता विभाग के सहायक व कनीय अभियंता को खराब पड़े चापानलों को अविलंब दुरुस्त करने का निर्देश दिया था.
