दो साल तक बम से खेलती रही पुलिस
बड़ा सवाल : ऐसी लापरवाही क्यों बरती गयी
दो साल से थाना के मुंशी के टेबुल पर था बम
किसी ने भी नहीं समझा वह पेपर वेट है या विस्फोटक
नक्सल प्रभावित इलाका है पाकुड़िया
पाकुड़ : पिछले दो साल से भी अधिक समय से आखिर मौत के सामानों से कैसे खेलती रही पाकुड़िया थाना की पुलिस? यह सवाल हर एक व्यक्ति के जेहन में पाकुड़िया थाना में हुए विस्फोट की घटना के बाद गूंज रही है. आम जनों को सुरक्षा देने वाली सरकार के इतनी महत्वपूर्ण इकाई में पदस्थापित पदाधिकारियों व जवानों द्वारा उपरोक्त मामले में आखिर कैसे इतनी बड़ी लापरवाही बरती गई, यह एक विचारणीय विषय है.
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पाकुड़ जिले में जिन नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तीन प्रखंड को शामिल गया है, उसमें एक नाम पाकुड़िया का भी शामिल है. नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण शुरू से ही प्रशासनिक गतिविधियां हमेशा से यहां तेज रही है. समय-समय पर वरीय पदाधिकारियाें का थाना पहुंचना, हर एक छोटी-बड़ी संभावनाओं को टटोलना उपरोक्त क्षेत्र में पुलिस के लिए आम बात हो चुकी है. बावजूद इसके थाना में ही मुंशी के टेबल पर ब्लैकटेप से साट कर विस्फोटक का रखा जाना और वर्षों से उक्त मौत के सामान को पेपरवेट के रूप में प्रयोग किया जाना निश्चित तौर पर पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है.
उपरोक्त घटना ने पुलिस महकमा की जहां नींद उड़ा दी है, वहीं गैर जिम्मेदार पदाधिकारियों के भरोसे क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं.
वर्ष 2014 के पूर्व से ही ब्लैकटेप में रखा गया था विस्फोटक
थाने में हुए विस्फोट में घायल मुंशी रमेश कुमार सिंह ने इलाज के बाद वापस लौटने पर एसपी अजय लिंडा को जो जानकारी दी है उसमें उन्होंने कहा है कि वर्ष 2014 के पूर्व से ही उसके टेबुल पर उपरोक्त विस्फोटक सामग्री का उपयोग पेपरवेट के रूप में किया जा रहा था. मुंशी द्वारा दी गई जानकारी में कहा गया है कि वर्ष 2014 में उनका पदस्थापन उपरोक्त थाना में हुआ था. तब से वह उसी सामग्री को पेपरवेट के रूप में उपयोग कर रहे थे.
कहते हैं एसपी
निश्चित तौर पर हुई है लापरवाही
एसपी अजय लिंडा ने कहा कि विस्फोट मामले में निश्चित तौर पर लापरवाही बरती गई है. उपरोक्त मामले को लेकर डीएसपी मुख्यालय नवनीत हेंब्रम को जांच का निर्देश दिया गया है. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पायेगा कि आखिर किस पदाधिकारी के कार्यकाल में उपरोक्त विस्फोटक सामग्री को ब्लैकटेप से लपेट कर रखा गया था और कैसे पूरी लापरवाही के साथ उसे पेपरवेट बना कर कार्य किया जा रहा था.
अजय लिंडा, एसपी
