बच्चे नहीं जानते क्यों मनाते स्वतंत्रता दिवस

पाकुड़ : एक ओर केंद्र व राज्य सरकार की ओर से शिक्षा के स्तर को उपर उठाने के लिये हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद भी शिक्षा का स्तर ऊपर उठने का नाम नहीं ले रहा है. जिले में भी शिक्षा का हाल बहुत बेहतर नहीं है. इसी […]

पाकुड़ : एक ओर केंद्र व राज्य सरकार की ओर से शिक्षा के स्तर को उपर उठाने के लिये हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद भी शिक्षा का स्तर ऊपर उठने का नाम नहीं ले रहा है. जिले में भी शिक्षा का हाल बहुत बेहतर नहीं है. इसी उद्देश्य से प्रभात खबर की टीम शुक्रवार को सदर प्रखंड के विभिन्न सरकारी विद्यालयों की पड़ताल की.
स्कूल के वर्ग पंचम, सप्तम व अष्टम के बच्चों से पूछा गया कि स्वतंत्रता व गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है. लेकिन बच्चे इस प्रश्न का उतर नहीं दे सके. इसके बाद बच्चों से डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के बारे में पूछा गया. लेकिन बच्चे इसका जवाब भी नहीं दे सके. आश्चर्य तो इस बात है कि जिले में आवासीय एवं गैर आवासीय प्रशिक्षण केंद्र चलाये जा रहे हैं. जिसमे पाकुड़ जिले में ही लाखों रुपये खर्च किये जा रहे हैं. जिसका उद्देश्य बच्चों में गुणात्मक सुधार लाया जाना है. लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद भी शिक्षा का स्तर उपर नहीं उठ पा रहा है.
केस स्टडी वन
सदर प्रखंड के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय निशानपाड़ा में 261 बच्चों का नामांकित हैं. यहां प्रभाात खबर की टीम सुबह 9:40 बजे पहुंची. उस वक्त बच्चे शिक्षक की उपस्थिति में गोटी खेल रहे थे. यहां तक कि उक्त समय तक प्रार्थना सभा भी नहीं करायी गयी थी.
केस स्टडी टू सदर प्रखंड के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बोस्टमडांगा में कुल 104 बच्चे नामांकित हैं. विद्यालय के बच्चों से जब स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस के महत्व के बारे में पूछा गया तो बच्चे इसका उतर नहीं दे सके. यहां तक कि राष्ट्रपिता व चाचा नेहरू के बारे में भी बच्चों को पता नहीं है.
क्या कहते हैं डीएसइ
शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये मैं खुद विद्यालय का निरीक्षण करूंगा तथा हर संभव शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिये प्रयास किया जायेगा.
अरुण कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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