पाकुड़. जेल में बंद बंदियों के बेहतर भविष्य और उन्हें हुनरमंद बनाने की तैयारी हो रही है. पाकुड़ मंडलकारा में बंद बंदियों में से 35 को मशरूम की खेती का प्रशिक्षण देने की तैयारी की गयी है. बुधवार से प्रशिक्षण देना शुरू किया गया है. मौके पर डीसी मनीष कुमार, एसपी प्रभात कुमार, आरसेटी निदेशक राजेश कुमार मिश्रा, मंडल कारापाल दिलीप कुमार, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ एसके झा और वरिष्ठ संकाय सह कार्यक्रम समन्वयक अमित कुमार बर्धन मौजूद रहे. सभी ने संयुक्त रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया. प्रोजेक्ट परिवर्तन के तहत जिला प्रशासन ने बंदियों को मशरूम की खेती का प्रशिक्षण देना शुरू किया है. आरसेटी सभी 35 बंदियों को मशरूम की खेती का प्रशिक्षण देगा. उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जेल में बंदियों को दस दिनों का प्रशिक्षण देना शुरू किया गया है. जेल में मशरूम की खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद वे जेल से रिहाई के बाद अपराध की दुनिया को छोड़कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे. इस पहल का उद्देश्य बंदियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और समाज की मुख्य धारा से जोड़ना है. पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने कहा कि आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रशिक्षण के बाद, रिहाई के उपरांत बंदी मशरूम की खेती को व्यवसाय के रूप में अपना सकते हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं. यह प्रयास न केवल उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि अपराध से दूर रहकर समाज में सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर भी प्रदान करेगा. मंच का संचालन करते हुए अमित कुमार बर्धन ने कहा कि जिला प्रशासन के सहयोग से बंदियों का यह तीसरे बैच का प्रशिक्षण है. इससे पूर्व आरसेटी पाकुड़ की ओर से सर्फ, साबुन, फिनायल, मेकिंग और फास्ट फूड स्टॉल उद्यमी पर प्रशिक्षण दिया गया है. लाभुकों को मशरूम उत्पादन के अलावा व्यक्तित्व विकास, उद्यमी योग्यता, समय प्रबंधन, वित्तीय समावेशन, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, विपणन, बैंकिंग व बीमा आदि से संबंधित जानकारी भी दी जायेगी.
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