राजकुमार कुशवाहा
पाकुड़ : जमीन के अभाव में पिछले पांच वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की ओर से लाखों रुपये की लागत से खरीदी गयी इंसिनेटर मशीन आज जंग खा रही है. स्वास्थ्य विभाग ने लगभग पांच साल पूर्व करीब 36 लाख की लागत से बायोमेडिकल कचरे के निष्पादन के लिए उपरोक्त मशीन की खरीदारी की थी. जानकारों के मुताबिक उस समय करोड़ों की प्रोजेक्ट स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य सुविधा बेहतर करने के उद्देश्य से कई मशीनों की खरीदारी की थी.
इंसिलेटर मशीन को छोड़ कर बाकी मशीनों को तो जैसे-तैसे सदर अस्पताल पाकुड़ में चालू तो कराया गया, पर उक्त मशीन को अस्पताल के ओपीडी के मुख्य द्वार पर आज भी उसी हालत में रखा गया है. देख-रेख के अभाव में मशीन में जंग लग रही है. लकड़ी के जिस डब्बे में मशीन को रखी गयी है, अब वह भी सड़ कर टूटने लगा है.
विभाग के पास मशीन को चालू करने के लिए नहीं है जमीन :
स्वास्थ्य विभाग की ओर से खरीदारी की गयी इंसिनेटर मशीन के लगभग पांच साल बीत गये, पर विभाग के पास इसे बैठाने व चालू करने के लिए कोई जमीन तक नहीं है. विभाग मशीन के लिए अब भी जमीन तलाश ही कर रही है.
पिछले पांच सालों में विभाग को कोई ऐसी जमीन नहीं मुहैया करायी गयी है. जिसमें मशीन को स्थापित कर अस्पताल में प्रतिदिन काफी मात्रा में जमा होने वाली बायोमेडिकल कचरे का निष्पादन किया जा सके.
जमीन नहीं तो आखिर कैसे हुई खरीदारी : स्वास्थ्य विभाग के पास जब अपनी कोई जमीन ही नहीं थी तो आखिर कैसे लाखों रुपये की लागत से बायोमेडिकल कचरे के निष्पादन को लेकर उपरोक्त मशीन की खरीदारी की गयी. विभाग के पास जमीन उपलब्ध नहीं होने के बावजूद हुई मशीन खरीदारी का यह मामला निश्चित तौर पर चौंकाने वाला है. इतना ही नहीं खरीदारी को लेकर भी अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं.
समझा जा रहा है कि कहीं कमीशनखोरी के लिए जानबूझ कर एक बड़ा प्रोजेक्ट तैयार कर मशीन की खरीदारी तो नहीं कर ली गयी है? अगर नहीं तो आखिर विभाग के पास कोई जमीन नहीं होने के बाद भी कैसे इतनी बड़ी लागत से मशीन की खरीदारी हुई? ऐसे कई सवाल विभाग पर उठना शुरू हो गया है. बहरहाल यह जांच का मामला है. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पायेगी कि आखिर किन परिस्थिति में विभाग ने मशीन की खरीदारी की है.
अस्पताल परिसर में ही फेंका जाता है कचरा
वर्तमान में विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अस्पताल से प्रतिदिन निकलने वाले बायोमेडिकल कचरा को अस्पताल के पीछे ही फेंक दिया जाता है. कचरा ढेर होने पर आग लगा कर उसे जलाया जाता है.
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक बायोमेडिकल कचरे में से सिरींज व घातक बेकार सामानों को केमिकल देकर गड्ढे में डाल दिया जाता है और उपर से मिट्टी ढक दी जाती है. आखिर लाखों रुपये की लागत से विभाग की ओर से मशीन खरीदारी के बाद भी इस हालत पर कब सुधार होगा, यह देखने वाली बात होगी.
क्या कहते हैं सीएस
बायोमेडिकल कचरे के निष्पादन को लेकर उपरोक्त मशीन की खरीदारी की गयी है. विभाग के पास कोई जमीन नहीं होने के कारण अब तक इसे इंस्टॉलेशन नहीं किया जा सका है. जमीन के लिए विभाग की ओर से संबंधित पदाधिकारी को जमीन मुहैया कराने को लेकर लिखा गया है. जमीन मिल जाने पर मशीन को इंस्टॉल किया जायेगा.
-डॉ नलिनिकांत मेहरा, सिविल सर्जन
