Padma Shri Simon Oraon Health Update: झारखंड के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता, ‘पड़हा राजा’ और जल पुरुष के नाम से मशहूर पद्मश्री सिमोन उरांव इन दिनों गंभीर रूप से बीमार हैं. करीब 87 साल सिमोन उरांव लकवे से पीड़ित हैं. फिलहाल, वे बेड़ो प्रखंड के हरिहरपुर जामटोली गांव में अपने घर पर ही इलाज करा रहे हैं. प्रभात खबर की टीम जब उनके आवास पहुंची, तो वे बिस्तर पर लेटे मिले और चलने-फिरने में पूरी तरह असहाय नजर आए.
घर पर जड़ी-बूटी और तेल मालिश से चल रहा इलाज
पद्मश्री के परिजनों के अनुसार, सिमोन उरांव ने फिलहाल बाहर जाकर इलाज कराने से साफ इनकार कर दिया है. उनका इलाज घर पर ही पारंपरिक जड़ी-बूटियों और नियमित तेल मालिश के जरिए किया जा रहा है. परिवार का कहना है कि वे अब अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाना चाहते. अपने गांव में रहकर ही इलाज कराना चाहते हैं.
रिम्स रांची समेत कई जगह कराया गया इलाज
बहू सेरोफिल उरांव ने बताया कि लकवा से ग्रस्त होने के बाद सिमोन उरांव का इलाज रांची के रिम्स सहित कई बड़े अस्पतालों में कराया गया. एलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेद और होम्योपैथी पद्धति से भी उनका इलाज कराया गया, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो सका. कई महीनों तक चले इलाज के बावजूद जब स्थिति में खास बदलाव नहीं आया, तब परिवार ने पारंपरिक इलाज का रास्ता अपनाने का फैसला किया.
पत्नी भी अस्वस्थ, बहू कर रही देखभाल
सिमोन उरांव की 82 वर्षीय पत्नी बिरजिनिया उरांव भी उम्र और कमजोरी के कारण काफी अस्वस्थ हैं. वे डंडे के सहारे ही किसी तरह चल पाती हैं. घर में दोनों बुजुर्गों की देखरेख मुख्य रूप से बहू सेरोफिल उरांव कर रही हैं, जो बेड़ो के रानीबगान के नए घर में रहकर उनकी सेवा में जुटी हैं.
चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ
परिजनों का कहना है कि लकवा लगने के बाद से सिमोन उरांव चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गए हैं. उन्हें उठने-बैठने, खाना खाने और दैनिक जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. नियमित रूप से शरीर में तेल मालिश की जाती है, ताकि दर्द और अकड़न से कुछ राहत मिल सके.
जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने की मुलाकात
सेरोफिल उरांव ने बताया कि इस दौरान कई जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और प्रशासनिक अधिकारी उनके घर आ चुके हैं. झारखंड के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, स्थानीय विधायक सह मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य आशा लकड़ा, रांची आर्चबिशप विंसेंट आइंद सहित कई गणमान्य लोगों ने सिमोन उरांव से मुलाकात की और बेहतर इलाज के लिए हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया. बावजूद इसके, सिमोन उरांव बाहर जाकर इलाज कराने को तैयार नहीं हुए.
‘जल पुरुष’ के नाम से मिली देशभर में पहचान
सिमोन उरांव ने दशकों तक झारखंड में जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम किया. उन्होंने बिना सरकारी मदद के दर्जनों तालाब, चेकडैम और जल स्रोत तैयार कराए, जिससे सैकड़ों गांवों को पानी मिला. उनके इसी योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा था. आदिवासी समाज में उन्हें आज भी ‘पड़हा राजा’ के रूप में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है.
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प्रशासन और समाज की नजरें उनके स्वास्थ्य पर
सिमोन उरांव का इलाज पूरी तरह घर पर चल रहा है. स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी समय-समय पर उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने पहुंच रहे हैं. पूरे क्षेत्र में लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं, ताकि झारखंड का यह जल योद्धा फिर से मुस्कुराते हुए नजर आ सके.
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